Monday, September 1, 2014

Ignore E-commerce at Your Own Risk - Inspirational and Motivational Story in Management Funda - N Raghuraman - 1st September 2014

ई-कॉमर्स की अनदेखी अाप अपने जोखिम पर ही करें


मैनेजमेंट फंडा - एन.रघुरामन

कुछ समय पहले दैनिक भास्कर में जयपुर के अरविंद जुनेजा के बारे में खबर छपी। अरविंद ई-बे पर नियमित रूप से सामान बेचते हैं। उन्होंने वेबसाइट पर कुछ दिन पहले 3.69 कैरेट का माणिक (रूबी) बेचने के लिए लिस्टेड किया। इसे बाद में एक अमेरिकी ने 8,20,000 रुपए में खरीदा। यह ई-बे पर ई-कॉमर्स के जरिए तब तक बिका सबसे महंगी रत्न था। इस मिसाल का मकसद यह बताना है कि ई-बे, फ्लिपकार्ट, अमेजन, जबोंग स्नैपडील जैसी कंपनियां देश में जगह बना रही हैं।

साल 2014 में फ्लिपकार्ट ने ही 5,290 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया है। मौजूदा वित्त वर्ष के बाकी बचे महीनों में ई-कॉमर्स में 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी और होने की उम्मीद है। पिछले साल भी ई-कॉमर्स इंडस्ट्री ने 63,480 करोड़ रुपए का व्यवसाय किया है। साफ है कि देश में ई-कॉमर्स कंपनियां पैर जमाने के संकेत दे रही हैं। उनकी योजनाएं देखकर भी ऐसा लगता है। ये कंपनियां 60,000 कर्मचारियों को भर्ती करने जा रही हैं। कहा तो जा रहा है कि यह आंकड़ा एक लाख तक भी जा सकता है।

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ये कंपनियां खासकर, सहायकों, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक (सामान लाने-ले जाने वाले) डिपार्टमेंट में भर्ती करना चाहती हैं। ऑनलाइन खरीद-फरोख्त का दायरा ऐसे ही बढ़ा तो फैक्ट्रियों में भी रोजगार बढ़ेगा, यह भी तय है। फ्लिपकार्ट ने जल्द 12,000 नए कर्मचारी भर्ती करने की घाेषणा की है। कंपनी की ई-कॉमर्स डिवीजन के साथ जुड़े इंजीनियरों की तादाद ही इस वक्त करीब 1,200 है। इसके अलावा देश के 30 अलग-अलग हिस्सों में जो लोग काम कर रहे हैं, उनकी तादाद अलग है।

एक और कंपनी है मंत्रा। इसने भी 500 नए कर्मचारी जोड़ने की योजना बनाई है। हालांकि इसे पिछले महीने ही 2,000 करोड़ रुपए में फ्लिपकार्ट ने खरीद लिया है। फिर भी भर्तियां तो होंगी ही। स्नैपडील के पास फिलहाल 1,300 कर्मचारी हैं। वह इसे दोगुना यानी 2,600 करने जा रही है। जबोंग को 750 नए कर्मचारी जोड़ने हैं। अमेजन आठ से 10,000 तक नए कर्मचारी भर्ती कर सकती है। जमातो को 650 कर्मचारियों की जरूरत है। पे-टीएम को 400 नए कर्मचारियों की तलाश है। टैक्सीफॉरस्योर 1,500 नए ड्राइवर भर्ती करने जा रही है। वहीं ओलाकैब 300 ड्राइवर भर्ती कर सकती है।

दुनिया में इस वक्त ई-कॉमर्स के जरिए खरीदारी करने वाले सबसे ज्यादा उपभोक्ता अमेरिकी हैं। अब तक मंदी झेल रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी इससे फायदा हुआ है। वहां की जीडीपी इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही 4.2 फीसदी रही है। कारखानों को भी ज्यादा माल तैयार करने के ऑर्डर मिल रहे हैं। और राेजगार भत्ता चाहने वालों की तादाद 3,00,000 तक सिमट गई है।

फर्क ये आया है कि 2007 की तुलना में ई-कॉमर्स के 2014 के ग्राहक भी अब क्वालिटी प्रोडक्ट की अपेक्षा रख रहे हैं। वह भी कम से कम कीमत पर। साथ में उन्हें वह सब गारंटी भी चाहिए जो सामान्य खुदरा बाजार में मिलती है। इन संकेतों को फ्यूचर ग्रुप के दिग्गज किशोर बियानी और गोदरेज फूड डिवीजन आदि ने भी शायद समझ लिया है। हालांकि ये वे लोग हैं जो रिटेल स्टोर खेलने में ज्यादा यकीन रखते हैं। लेकिन इसके बावजूद अब ई-कॉमर्स की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इन कॉरपोरेट समूहों ने सीनियर और मिडिल लेवल के अफसरों को ई-कॉमर्स का काम देखने के लिए लगा दिया है। साथ ही नई भर्तियां करने को भी कहा है।

भारत के ऑनलाइन रिटेल बिजनेस क्षेत्र में निवेश करने के लिए दुनिया के बड़े निवेशक लाइन लगाए हुए हैं। और निश्चित रूप से करते जा रहे हैं, करेंगे भी। ऐसे में, नौकरी ढूंढ़ने वालों को भी इस नए उभरते क्षेत्र के हिसाब से खुद को तैयार कर लेना चाहिए। मौके काफी हैं।

फंडा यह है कि...

ई-कॉमर्स का क्षेत्र ऐसा है जिसके टिकने की संभावना खारिज नहीं की जा सकती। हालांकि यह कितना ज्यादा टिकेगा, इस पर दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी इसकी अनदेखी करना समझदारी नहीं होगा। और अगर आप अनदेखी कर रहे हैं तो यह आप अपने जोखिम पर कर रहे हैं। खासकर नौकरी की तलाश करने वाले लोग।


Ignore E-commerce at Your Own Risk


































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