Thursday, July 3, 2014

Businesses are Getting Rid of Middleman - Inspirational and Motivational Story in Management Funda - N Raghuraman - 3rd July 2014

Vegetable prices are skyrocketing by each passing day, the quality is at its lowest, in such conditions corporate hotels like ITC and Taj or even a family having 10+ members have opted for a phenomenon which has caught on is to grow vegetables in your own backyard.


ITC Golf and Spa Resort is soon going to be operational at Manesar, Gurgaon in Haryana. Here about 11 Acres of farming land is available too, where they plan to grow vegetables. In the same way Hotel Fourseasons in Mumbai, have also bought a farming land to cultivate seasonal vegetables according to their choice and requirements.


Actually all of them are worried about the rising cost of different vegetables, in the same way families too are worried about the quality of vegetables which they buy as the farmers are using pesticides to grow them, which adversely affects the health. Not only this even farmers tend to irrigate their vegetable farmland with sewage water, which has led people to grow vegetables in their own backyard.


Raaji Shankaran from Chennai has about vacant 600 Sq. Feet land adjoining his home besides about 800 Sq. Ft terrace garden, where he grows different seasonal vegetables. Raaji Shankaran has 9 members in his family and it is but natural that the consumption of vegetables will be more, in such an scenario he produces Onions, Potatoes or any other seasonal green vegetables.

There are two benefits from this, first this keeps him busy and second, he is satisfied that his family members are getting fresh vegetables to eat, and instead of pesticides they are benefited with the nutritional value of the vegetables. In the same way Hotels and the food industry too gets benefited immensely.

For example Hotel Industry imports Heirloom varieties of tomatoes from the Netherlands which costs about Rs 1000/- to 1500/- per Kilogram, but if the same is grown in our own backyard then the same variety would cost Rs 120/- to 150/- Per Kilogram. Marzano Tomatoes comes from Italy and it costs Rs 1300/- to 1800/- per Kilogram, when grown in India it would cost just Rs 120/- per Kilogram. There is a chilli variety known as Thai Birds Eye Chilli which costs about Rs 600/- to 850/- per Kilogram when imported, but if grown in India it would cost just Rs 110/- Per Kilogram. It's not just about the cost but other factors like Import procedures, storage, and transportation problems add to one's woes. While importing 25% of the vegetables gets rotten and to get it cleared of the customs a middleman is also hired, who take their cut too. All the above leads to escalation in cost of procurement.

But when grown at our own backyard, you get rid of all these problems. Whether it's the Hoteliers or the residents of Bandra suburb most of them have opted to grow vegetables in their backyard. There is a hotel Sofitel in Bandra, which has a restaurant - Pondicherry Cafe. The cafe has its own kitchen garden, where they grow Tomatoes, Italian Tulsi (Basil), Carom or Bishops Weed, Brinjals and other varieties of vegetables.

In South Mumbai there is an Advertising Professor, Ms Rajeshwari Ravi, she too grows vegetables in her kitchen garden, whenever she needs vegetables she goes to her kitchen garden and pluck the vegetables. According to her there is altogether a different feeling when you cook fresh vegetables. In fact the trend for the kitchen garden has caught on among the higher class and is usually seen as a fashion statement.  

Credits: Transliteration done by Appoorv Saxena from the column Management Funda by N Raghuraman which appears in Dainik Bhaskar   

बिजनेस से बिचौलिए धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं


मैनेजमेंट फंडा  -  एन. रघुरामन



सब्जियों के दाम रोज आसमान छू रहे हैं। क्वालिटी भी खराब होती जा रही है। इन हालात में आईटीसी और ताज जैसे होटल हों या 10 लोगों से ज्यादा सदस्य वाले बड़े परिवार। सभी ने अपने अहाते में ही सब्जियां उगाने का बीड़ा उठाया है। 

हरियाणा में गुडग़ांव के मानेसर में आईटीसी गोल्फ एंड स्पा रिसॉर्ट शुरू होने वाला है। यहां करीब 11 एकड़ का खेत भी है, जहां कंपनी सब्जियां उगाने वाली है। इसी तरह मुंबई में फोरसीजन होटल ने भी महानगर के पास ही एक जगह खेती की जमीन खरीदी है। ताकि वह मौसम और पसंद के हिसाब से सब्जियां उगा सके। 

बड़े होटलों या कंपनियों को सब्जियों पर बढ़ रही लागत की चिंता है। वहीं परिवारों को इस बात की कि इन्हें उगाने के लिए लोग कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। यही नहीं, सब्जियों की सिंचाई के लिए कई बार पानी भी खराब उपयोग किया जाता है। लिहाजा वे भी अपने किचन गार्डन में सब्जियां लगाने की तरफ मुड़े हैं। 

Source: Businesses are Getting Rid of Middleman - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 3rd July 2014   



चेन्नई में रहने वाले राजी शंकरन के पास उनके घर से लगी 600 वर्गफीट जमीन है। साथ ही 800 वर्गफीट का टैरेस गार्डन भी है। यहां वे सीजन के हिसाब से हर किस्म की सब्जी उगाते हैं।

राजी शंकरन के परिवार में नौ सदस्य हैं। लिहाजा, उनके यहां सब्जियों की खपत भी स्वाभाविक तौर पर ज्यादा है। ऐसे में प्याज हो, आलू या फिर कोई दूसरी सीजनल हरी सब्जी। सब उनके घर में उपलब्ध हो जाती है। 

इससे उन्हें दो फायदे होते हैं। पहला तो वे व्यस्त रहते हैं। दूसरा एक तरह का संतोष मिलता है कि परिवार ताजी और साफ-सुथरी सब्जियां खा रहा है। उनके शरीरों में कीटनाशकों के बजाय सब्जियों के जरिए पौष्टिक तत्व जा रहे हैं। इसी तरह होटल या फूड इंडस्ट्री की अन्य कंपनियों को भी अपने स्तर पर सब्जियां उगाने से फायदा ही फायदा है। 

मिसाल के लिए होटल इंडस्ट्री हरलूम टमाटर का नीदरलैंड से आयात करती है। लागत बैठती है- 1,000 से 1,500 रुपए प्रति किलोग्राम। अगर इसको अपने देश में ही उगाएं तो लागत आएगी 120 से 150 रुपए प्रति किलो। मरजानो टमाटर इटली से आता है। लागत होती है-1,300 से 1,800 रुपए प्रति किलो। इसे भी देश में उगाया जाए तो 120 रुपए प्रति किलो पड़ेगा। मिर्च की एक किस्म है- थाई बड्र्स आई। इसे विदेश से 600 से 850 रुपए प्रति किलो के हिसाब आयात किया जाता है। भारत में उगाने पर यह 110 रुपए किलो पड़ेगी।
यह बात तो है सिर्फ लागत के फर्क की। आयात की प्रक्रिया, स्टोरेज और परिवहन की दिक्कतें अलग से। सब्जियों को विदेश से लाते वक्त उनमें से करीब 25 फीसदी खराब हो जाती हैं। कस्टम से सब्जियों को निकलवाने के लिए बिचौलियों की मदद लेनी पड़ती है। वे भी अपना मार्जिन लेते हैं। इससे लागत और बढ़ जाती है। 

लेकिन घरेलू स्तर पर सब्जियों को उगाने से इन सभी समस्याओं से एक साथ निजात मिल जाती है। मुंबई के उपनगरीय इलाके बांद्रा में होटल्स हों या स्थानीय रहवासी। ज्यादातर जगहों पर अपने स्तर पर ही सब्जियां उगाई जा रही हैं। बांद्रा के सोफीटेल होटल का रेस्टोरेंट है- पोंडिचेरी कैफे। इसका अपना एक किचन गार्डन है। यहां टमाटर, इटैलियन तुलसी, अजवायन की पत्ती, बैगन और भी कई किस्म की सब्जियां आदि उगाए जाते हैं। 

दक्षिण मुंबई के एक कॉलेज में एडवरटाइजिंग प्रोफेसर हैं-राजेश्वरी रवि। ये भी किचेन गार्डन में सब्जियां उगाती हैं। किचेन में जब जरूरत होती है तुरंत अपने बगीचे से सब्जियां तोड़ लाती हैं। उनके मुताबिक, इन्हें ताजा-ताजा लाकर पकाने का आनंद ही कुछ और है। बल्कि यह चलन तो इन दिनों समाज के उच्च तबके का फैशन स्टेटमेंट हो चुका है।


फंडा यह है कि...



अगर आप किसी बिजनेस में बिचौलिए हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि बिचौलिओं का कारोबार खत्म हो रहा है। वह वक्त अब दूर नहीं जब उत्पादक और उपभोक्ता के बीच का फर्क खत्म हो जाएगा। 

 

Management Funda By N Raghuraman

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Source: Businesses are Getting Rid of Middleman - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 3rd July 2014