Friday, July 4, 2014

The Good Thing About Human Being is Being Human - Inspirational and Motivational Story in Management Funda - N Raghuraman - 4th July 2014

They are youth, and none of them is more than 28 years old, they all are educated and in good jobs with a decent pay check, but even after this they still feel that if something wrong is happening in the society then it is their job to put it right or they just want to keep on doing things which relaxes them and brings in the feeling that they have done something better today. In the whole week they only dedicate a day or two for the society.

First Inspiring and Motivating Story:

We all are aware that every four minutes one person dies in an road accident, but none of us are aware of the fact that how many animals die in road accidents. Not a single NGO or a person has such an record. In an road accident pet and wild animals both die, leave alone the records, we do not even care to remove these dead animals from the middle of the road on to the side, but some how zig-zag our way to continue with our journey.

But Nitin Jaani and his friends who works for Teemex Solutions in Pune, do care about these dead animals. Most of the time they set out on Pune - Lonavala or Pune - Satara Highway and where ever they find a dead animal, they remove them from the road, dug out a grave and later bury them. Doing all this doesn't take more than five minutes. 

Just last Friday Nitin and his friends set out on highway for 12 hours and found 28 dead animals who met with an road accident, all these animals were removed from the road and were buried. 

Second Inspiring and Motivating Story:

Just how we ignore dead animals on road in the same way how many of us ignore the advertisements hanging on the tress? we are aware that these advertisements serves the purpose of providing information but on the other hand it also destroys the trees. 

But Marketing Director of Reapsocial, which is based out of Coimbatore, Tamilnadu is not one among us, he cares for the trees. He and his company motivates and inspires people to send them the pictures of injured or a wounded tree because of the advertisements nailed on it, which is posted on their companies website. Along with the pictures people have to send the information about the locality.

Armed with information from people Arvind and his 15 member strong team reaches the spot, removes the hoarding and nails from the tree, rectifies the tree. They also inspire and motivate people to actively participate in such activity. Later they employ those techniques by which new life can be given to the tree.  

Arvind and his team uses scientific methods, they also carry along with them scientific reports, facts and research papers to make people understand the ill effects of nailing the nail on the tree. Arvind goes on to claim that when ever a tree is nailed, especially the old ones, there is every possibility that termites can enter into it and later make the tree hollow from inside.

The iron in the nail also affects the growth of the tree, He goes on to say that advertisers opt for these type of advertisement banners, because it is comparatively lot cheaper than other modes of advertising. But very few of them actually knows that they are taking away the life of a tree. According to Arvind, when everyone is worried about greenery coming to an end, then they should also be equally concerned about the ways the tree is being killed.     

            
Credits: Transliteration done by Appoorv Saxena from the column Management Funda by N Raghuraman which appears in Dainik Bhaskar

इंसान होने की सबसे अच्छी बात है इंसानियत


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


युवा हैं। उनमें से कोई भी 28 साल से ज्यादा की उम्र का नहीं है। पढ़े-लिखे हैं। बढ़िया नौकरी कर रहे हैं। हर महीने तनख्वाह भी अच्छी पाते हैं। इसके बाद भी उन्हें लगता है कि समाज में अगर कहीं कुछ गलत हो रहा है तो उसे ठीक करना भी उनका काम है। या फिर वे ऐसा कुछ भी करते रहना चाहते हैं जिससे उन्हें सुकून मिले।

लगे कि आज कुछ बेहतर कर के आए हैं। वे हर हफ्ते में सिर्फ एक या दो दिन ही लगाते हैं, समाज को अपना

योगदान देने के लिए।

पहली कहानी : 


हम सब जानते हैं कि सड़क दुर्घटना में हर चार मिनट में एक इंसान की मौत होती है, लेकिन हममें से यह कोई नहीं जानता कि सड़कों पर आए दिन हो रही दुर्घटना में कितने जानवर मर जाते हैं। न तो किसी संगठन के पास और न  ही किसी व्यक्ति के पास इस तरह का रिकॉर्ड है। दुर्घटना में जंगली जानवर भी मरते हैं और पालतू भी। इनकी मौतों के रिकॉर्ड की बात तो छोड़िए, सड़कों पर चलते हुए हम में से कोई भी इन आवारा मरे जानवरों हुए जानवरों को हटाकर किनारे करने तक की जेहमत नहीं उठाता। बस, किसी तरह बच-बचाकर निकल जाते हैं। 

Source:  The Good Thing About Human Being is Being Human - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 4th July 2014



लेकिन पुणे की टीमैक्स सॉल्यूशन्स में काम करने वाले नितिन जानी और उनके दोस्त इन मरे हुए जानवरों की भी फिक्र करते हैं। ये लोग अक्सर पुणे-लोनावाला या पुणे-सतारा मार्ग पर निकल जाते हैं। इन सड़कों पर जो भी जानवर मरे हुए मिलते हैं उन्हें सड़क से हटाते हैं। 

इन जानवरों के लिए कब्र खोदते हैं। फिर उन्हें उसमें दफन कर देते हैं। इस सब में उन्हें पांच मिनट से ज्यादा नहीं लगता। अभी पिछले शुक्रवार की ही बात है। नितिन और उनके दोस्त दोनों हाईवे पर करीब 12 घंटे घूमे। उन्हें 28 जानवर सड़कों पर मरे पड़े मिले। उन्होंने इन सभी को सड़कों से हटाकर दफन किया।


दूसरी कहानी : 


जैसे हम आवारा मरे जानवरों को नजरअंदाज करते हैं, उसी तरह पेड़ों पर टंगे विज्ञापनों को भी अनदेखा करते हैं। हम जानते हैं कि पेड़ों पर टंगे बोर्ड अगर हमें किसी विषय की जानकारी देते हैं तो दूसरी तरफ पेड़ों को नुकसान भी पहुंचाते हैं। 

लेकिन तमिलनाडु के कोयंबटूर में रीपसोशल कंपनी के मार्केटिंग डायरेक्टर अरविंद जयरामन हमारे जैसे लोगों में से नहीं हैं। वे पेड़ों की फिक्र करते हैं। वे और उनकी कंपनी ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करती है जो उन्हें विज्ञापनों की वजह से घायल पेड़ों की तस्वीरें भेजते हैं। उनकी कंपनी की वेबसाइट पर इन तस्वीरों को पोस्ट करना होता है।

तस्वीरों के साथ लोकैलिटी की जानकारी भी भेजनी होती है। फिर इस जानकारी के आधार पर अरविंद अपनी
टीम के 15 सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचते हैं। उस पेड़ से होर्डिंग्स और कीलें वगैरह हटाते हैं। उन्हें दुरुस्त करते हैं। वे लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके बाद वे उन तरीकों को आजमाते हैं जिनके जरिए पेड़ों को नई जिंदगी दी जा सके। 

अरविंद और उनकी टीम वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। लोगों को बात समझ आए, इसके लिए वे बाकायदा रिसर्च और तथ्यों के जरिए बताते हैं कि पेड़ों में कीलें ठोकने से किस तरह नुकसान होता है। अरविंद दावा करते हैं कि जब भी पेड़ों में कीलें ठोकी जाती हैं, खासकर, पुराने पेड़ों में तो उनमें कीड़ों को घुसने की गुंजाइश मिल जाती है। फिर वे उन पेड़ों को भीतर ही भीतर खोखला कर देते हैं। 

कीलों की धातु से पेड़ों की बढ़त भी प्रभावित होती है। वे कहते हैं कि पेड़ों पर विज्ञापन टांगना बहुत कम
खर्चीला है। लिहाजा, लोग यही तरीका अपनाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ऐसा करने से वे पेड़ से उसकी जिंदगी छीन रहे हैं। अरविंद के मुताबिक, दुनिया जब हरियाली लगातार कम होने की चिंता कर रही है, तो पेड़ों को इस तरह खत्म किए जाने की भी चिंता करनी चाहिए।

फंडा यह है कि :


इंसान होने की सबसे अच्छी चीज है इंसानियत। इंसानियत बनाए रखने के लिए, उसके इस्तेमाल के लिए क्या उम्र का कोई बंधन हो सकता है। बिल्कुल नहीं। 

 

Management Funda By N Raghuraman

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Source:  The Good Thing About Human Being is Being Human - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 4th July 2014