Tuesday, December 31, 2013

Grounded Farooq Sheikh Of Sky Palaces - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 31st December 2013

'आसमान महल' का जमीनी फारुख शेख 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री  पद की शपथ ली, उसके चंद घंटे पहले ही सातवें-आठवें दशक में समानांतर सिनेमा में आम आदमी की भूमिका करने वाले कलाकार फारुख शेख की मृत्यु दुबई में हो गई। हालांकि इस संयोग का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं है और न ही दल के लिए कोई अशुभ संकेत है। ज्ञातव्य है कि फारुख शेख गुजरात के ग्रामीण क्षेत्र के जमींदार घराने के युवा थे और उनके पिता भी खुले विचारों के थे। उन्होंने पारसी महिला से विवाह किया था। इस तरह फारुख शेख के जीन्स में मुस्लिम एवं पारसी श्रेष्ठी वर्ग के लोगों का प्रभाव था। अधिकांश फिल्मों में वे गरीब या मध्यम वर्ग के युवा की भूमिकाएं करते रहे। केवल मुज्जफ्फर अली की 'उमरावजान अदा' में सामंतवादी वातावरण में सांस लेने वाली फिल्म में उन्होंने अभिनय किया। उसी काल खंड में अमोल पालेकर ने भी आम आदमी की भूमिकाओं का निर्वाह किया। अमोल के लिए वे भूमिकाएं उसका 'भोगा हुआ यथार्थ' थी परंतु फारुख शेख श्रेष्ठी वर्ग के थे, इसके बावजूद उन्होंने अत्यंत विश्वसनीयता से आम आदमी की भूमिकाओं का निर्वाह किया। यह बात भी गौरतलब है कि उसी काल खंड में मुख्यधारा की फिल्मों में संजीव कुमार अभिनय में स्वाभाविकता के महान कलाकार थे और फारुख शेख वही काम सार्थक समानांतर फिल्मों में कर रहे थे। अभिनय की दृष्टि से संजीव कुमार और फारुख शेख सगे भाइयों की तरह थे। पर उनकी फिल्मों का स्केल अलग था। 

Source: Grounded Farooq Sheikh Of Sky Palaces - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 31st December 2013

Monday, December 30, 2013

Addiction Ruins Vibrant Lives - Management Funda - N Raghuraman - 30th December 2013

खुशहाल जिंदगी बर्बाद कर देती है बुरी लत 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


कुट्टी कृष्णन एक दिहाड़ी मजदूर है। ईमानदार। शराब, बीड़ी-सिगरेट या तंबाकू की कोई बुरी लत नहीं। इस वजह से साथी भी उसकी काफी इज्जत करते हैं। लेकिन एक रोज उसकी पत्नी को कृष्णन का दूसरा पहलू भी पता चला। दरअसल, बीते कई दिनों से कृष्णन ने घर खर्च के लिए एक भी रुपया नहीं दिया। उसके पूरे परिवार को 10 दिन से भूखे पेट सोना पड़ रहा था। उसकी पत्नी को समस्या की वजह समझ नहीं आ रही थी। एक दिन अचानक उसकी मुलाकात कृष्णन के साथ काम करने वाले कुछ लोगों से हुई। उन्होंने उसे बताया कि कृष्णन को लॉटरी खेलने की लत लग गई है। लॉटरी के टिकट खरीदने में ही वह अपनी रोज की कमाई खर्च कर देता है। कृष्णन की पत्नी पति के सामने घर की जरूरतों के लिए पैसे न होने का मामला उठाने लगी। इस पर कृष्णन कई बार आपा खो देता। अक्सर उसके साथ मारपीट करता। इसके साथ ही पत्नी से एक बात और कहता कि अगर वह शराबी होता तो क्या करती। 

Source: Addiction Ruins Vibrant Lives - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 30th December 2013

Mahabharat And Moksh Opposite Dhoom - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 30th December 2013

धूम के सामने महाभारत और मोक्ष

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे

बॉक्स ऑफिस पर धूम की आंधी के कारण जयंतीलाल गढ़ा की 'महाभारत' को दर्शक नहीं मिले और अजीत भैरवकर निर्देशित 'मोक्ष' का हाल भी बेहतर नहीं है। हमारा सिनेमा इतना सितारा केन्द्रित है कि कथा की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। 'मोक्ष' की कथा का आधार महाराष्ट्र की पंढरपुर यात्रा है। अठारह दिन की इस धार्मिक यात्रा में 240 किलोमीटर चलना होता है। भगवान विठोबा के अनगिनत भक्त इस यात्रा में भाग लेते है। दरअसल सारी यात्राएं दो स्तर पर चलती हैं- बाहरी यात्रा और भीतरी तलाश जैसे धरती भी अपने ध्रुव पर घूमने के साथ ही आकाश गंगा में अपने पथ पर भी चलती है और दोहरे स्तर पर की गई इस यात्रा के कारण ही दिन-रात होते हैं और मौसम चक्र भी घूमता है। मनुष्य के विकास में यात्रा का बहुत महत्व है। मानसरोवर यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है 
 
Source: Mahabharat And Moksh Opposite Dhoom - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 30th December 2013 

Sunday, December 29, 2013

Understand The Purpose Behind Every Thing - Management Funda - N Raghuraman - 29th December 2013

हर चीज का मकसद समझें 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


स्कूल के पहले दिन श्रीमती थॉम्पसन सातवीं क्लास में पहुंची। वहां उनकी मुलाकात टैडी से हुई। मैली स्कूल ड्रेस और बिखरे बालों वाले टैडी के साथ उनका व्यवहार हमेशा रूखा रहता। एक महीने में टैडी क्लास में बताई जाने वाली हर नकारात्मक बात का उदाहरण बन गया था। प्रिंसिपल ने जब टैडी की मूल्यांकन रिपोर्ट देखी तो वे चौंक गईं। उन्होंने थॉम्पसन से कहा कि प्रोग्रेस रिपोर्ट में यह दिखना चाहिए कि बच्चे ने कितनी प्रगति की है। आपने जिस तरह से प्रोग्रेस रिपोर्ट में टिप्पणियां की हैं उससे बच्चे के सुधार की सारी उम्मीदें खत्म हो जाती हैं। प्रिंसिपल की बात पर थॉम्पसन ने कहा कि इस बच्चे में ऐसा कुछ नहीं है जिसे सराहा जाए। इसके बाद प्रिंसिपल ने एक कर्मचारी को बुलाकर टैडी की पहली से लेकर छठी क्लास तक की प्रोग्रेस रिपोर्ट लाकर थॉम्पसन को देने को कहा। रिपोर्ट से थॉम्पसन को पता चला कि चौथी क्लास तक टैडी क्लास में हमेशा फस्र्ट आता था। लेकिन उसकी पांचवी क्लास की प्रोग्रेस रिपोर्ट से पता चला कि टैडी की माता को कैंसर था। छठी क्लास की प्रोग्रेस रिपोर्ट में टीचर ने लिखा कि टैडी अपनी मां को खो चुका है। इसका बुरा असर उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। इस बच्चे को तुरंत सहायता की जरूरत है नहीं तो हम बच्चे को खो देंगे। 

Source: Understand The Purpose Behind Every Thing - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 29th December 2013 

Saturday, December 28, 2013

Your Observation Is Key To Big Decisions - Management Funda - N Raghuraman - 28th December 2013

बड़े फैसलों की कुंजी है आपका अवलोकन 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


कहानी 1: 

फिल्म 'धूम तीन' इस साल 'चेन्नई एक्सप्रेस' जैसी कई फिल्मों को रिकॉर्ड के मामले में तेजी से पीछे छोड़ रही है। लेकिन इस फिल्म से पटना की पुलिस खासी चिंतित है। पुलिस का मानना है कि नए साल के जश्न में उनका पाला आमिर खान स्टाइल के कई नौजवानों से पड़ेगा। जो फिल्म में आमिर द्वारा किए बाइक स्टंट से प्रभावित होकर शहर की सड़कों पर अपनी बाइकें भी उसी अंदाज में दौड़ाएंगे। इससे वे अपने साथ-साथ दूसरे लोगों के लिए भी खतरे पैदा करेंगे। इसके लिए आमिर और 'धूम तीन' को दोष दिया जा सकता है, लेकिन आमिर खान खुद यह नहीं चाहते कि युवा फिल्म में किए स्टंट सीनों को सड़कों पर दोहराएं। इस स्थिति को देखते हुए पटना पुलिस ने ऐसे नौजवानों को पकडऩे के लिए तैयारियां की हुई हैं। पटना की प्रमुख सड़कों पर आपको हर एक से दो किलोमीटर की दूरी पर पुलिसकर्मी मौजूद मिलेंगे। यह पुलिसकर्मी एंटी रैश ड्राइविंग सेल के सदस्य हैं। अगर कोई अंधाधुंध बाइक चलाते हुए पकड़ा जाता है तो उसकी बाइक जब्त कर ली जाएगी। और जनवरी के दूसरे हफ्ते में उसे बाइक लौटाई जाएगी। दरअसल नए साल की पूर्व संध्या के मौके पर ज्यादातर लोग मौज-मस्ती में शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं। सर्द मौसम में छाई घने कोहरे की चादर इस दौरान दुघर्टनाओं के खतरों को और बढ़ा देती है। लिहाजा पटना पुलिस ने तय किया है कि जिसकी भी बाइक पकड़ी जाएगी उसे नए साल के जश्न का खुमार पूरी तरह उतरने के बाद ही लौटाया जाएगा। 

Source: Your Observation Is Key To Big Decisions - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 28th December 2013

A Story Told Many Times - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 28th December 2013

एक कथा जो बार-बार बनाई जाती है 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


एक लोकप्रिय गायक की मुलाकात एक नई गायिका से होती है और उसके गीत में वह बाधा पहुंचाता है जिसका परिणाम यह होता है कि उस युवा गायिका के अवसर समाप्त हो जाते हैं। अपने अपराध बोध से ग्रसित लोकप्रिय गायक उस अनाम लड़की की तलाश में भटकता है। कुछ समय बाद उसे एक कस्बे में वह लड़की मिलती है। वह उससे क्षमा याचना करता है और उसे उसकी प्रतिभा में यकीन करने की सलाह देता है। उसे अपने साथ बड़े स्टूडियो भी ले जाता है और अवसर दिलाता है। कुछ ही दिनों में लड़की अत्यंत लोकप्रिय हो जाती है परंतु उसका गाइड असफलता सहन नहीं कर पाता और बेतहाशा शराब पीने लगता है। वह बीमार हो जाता है परंतु शराब पीना जारी रखता है। गोयाकि एक तरह से वह स्वयं को नष्ट करने पर आमदा है। यह रहस्यमय मृत्यु आकांक्षा उसे पतन के गर्त में ले जाती है। युवा गायिका बार-बार कोशिश करती है कि वह शराब छोड़ दे। अपनी सेहत का ध्यान रखे। यहां तक कि उसकी खातिर वह अपने करिअर को भी छोडऩा चाहती है। नायक महसूस करता है कि उसका नैराश्य उसकी प्रेमिका के जीवन में रोड़ा बनता जा रहा है। अत: अपनी प्रेमिका को अपने श्राप जैसे जीवन से मुक्त करने के लिए आत्महत्या कर लेता है। नायिका स्वयं को उसकी विधवा सगर्व घोषित करती है। 

Source: A Story Told Many Times - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 28th December 2013

Friday, December 27, 2013

Listen To Your Heart Before Making Big Decisions - Management Funda - N. Raghuraman - 27th December 2013

जिंदगी के बड़े फैसले लेने से पहले एक बार जरूर सुनें दिल की बात


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन   


क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर को जैक्स हैंड्री कैलिस डेल स्टेन के साथ सामान्य दिनों की तरह गेंदबाजी का अभ्यास कर रहे थे। उनकी टीम भारत के खिलाफ दूसरा टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार हो रही थी। लेकिन कैलिस का मन जानता था कि इस हफ्ते वे टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे। अपने टेस्ट कॅरिअर को वह उसी मैदान में अलविदा कहेंगे जहां से उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ वर्ष1995-96 में शुरूआत की थी। हालांकि कैलिस वन डे इंटरनेशल खेलेंगे, खासकर वर्ष 2015 में होने वाले वल्र्ड कप तक। क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर और आज के दौर में दक्षिण अफ्रीका के सबसे महत्वपूर्ण इस खिलाड़ी ने अपनी भावनाओं और शरीर की भाषा को इतना संयत रखा कि कोई यह पता भी नहीं लगा पाया कि बाहर क्या आने वाला है। और जब उन्होंने लंच पर संन्यास की घोषणा की तो पूरी दुनिया हैरान रह गई। 38 वर्ष और 71 दिन के कैलिस ने अगले साल फरवरी में आस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज से पहले संन्यास लेने की घोषणा की है। इसके साथ उन्होंने, अपने घरेलू मैदान केपटाउन न्यूलैंड्स में एक और मैच खेलकर अवकाश लेने का मौका गवां दिया। टेस्ट मैचों में कैलिस चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। सचिन तेंदुलकर के 51 शतकों के बाद उनके 165 मैचों में बनाए गए 44 शतक दूसरे नंबर पर आते हैं। उन्होंने अपने 18 साल के कॅरिअर में बेहद कुशल गेंदबाजी की बदौलत 292 विकेट भी लिए हैं। कैलिस ने बल्लेबाजी में भी कुशलता की उम्दा मिसाल पेश की है। उन्होंने बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच पूरा संतुलन बनाए रखा। 

Source: Listen To Your Heart Before Making Big Decisions - Management Funda By N. Raghuraman - Dainik Bhaskar 27th December 2013

Sunny Deol Son's Debut - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 27th December 2013

सनी देवल का पुत्र आ रहा है?


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


सनी देवल अपने सुपुत्र को किसी युवा निर्देशक के द्वारा प्रस्तुत करना चाहते हैं और उन्होंने 'वेक अप सिड' एवं 'ये जवानी है दीवानी' के लेखक निर्देशक अयान मुखर्जी से मुलाकात की और अपने पुत्र से भेंट कराई। सनी देवल अपने पुत्र की पहली फिल्म अत्यंत भव्य पैमाने पर बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह तय कर लिया है कि वे अपने पुत्र को निर्देशित नहीं करेंगे तथा निर्देशक युवा वर्ग का ही होगा। उनके निर्देशकों की सूची में इम्तियाज अली भी हैं। उन्होंने यह भी तय किया है कि यह प्रेम-कथा ही होगी। ज्ञातव्य है कि उनके पिता धर्मेंन्द्र ने अपने पुत्र सनी को राहुल रवैल निर्देशित फिल्म 'बेताब' में प्रस्तुत किया था। राहुल को चुनने का कारण यह था कि वह राजकपूर का सहायक था जब धर्मेन्द्र 'मेरा नाम जोकर' में काम कर रहे थे और राजेंद्रकुमार ने भी अपने बेटे कुमार गौरव को राहुल रवैल से ही 'लव स्टोरी' में निर्देशित किया था। ज्ञातव्य है कि 'बेताब' और 'लव स्टोरी' का संगीत आरडी बर्मन का था और उन्हें युवा फिल्मों के लिए श्रेष्ठ संगीतकार माना जाता था। जब सितारा पिता अपने बेटे को प्रस्तुत करता है तब उसे खर्च की कोई चिंता नहीं होती। 

Source: Sunny Deol Son's Debut - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 27th December 2013

Thursday, December 26, 2013

Good Deeds Always Come Back To You - Management Funda - N Raghuraman - 26th December 2013

पानी में फेंकी गई रोटी हमेशा आपके पास ही लौटकर आती है


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


नीनन वर्गीज एक क्रिश्चियन थे। वे एक संस्थान में कैंटीन चलाया करते थे। इस नाते वे अक्सर छात्रों के संपर्क में रहा करते थे। कई मौकों पर उनकी कैंटीन में आने वाले छात्रों के पास खाने के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे। वर्गीज ऐसे छात्रों को मुफ्त में खाना खिलाया करते थे। अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों में से कुछ उनके पैसे दे दिया करते थे। कुछ छात्र पैसे नहीं दे पाते थे। क्रिसमस के मौके पर वर्गीज ऐसे गरीब छात्रों को अपने घर दावत पर बुलाया करते थे। उनका घर एक झोपड़ी थी। दावत में कई व्यंजनों के अलावा फिश करी भी होती थी। यह वर्गीज के गृह राज्य केरल का सबसे मशहूर व्यंजन है। वर्गीज ने इस परंपरा को साल दर साल कायम रखा। छात्रों के कई बैच आए और गए। वर्गीज के यहां अक्सर खाना खाने वाले कई छात्रों को अच्छी जगह पर नौकरी भी मिल गई। इस संस्थान के कई पुराने छात्र अभी भी वर्गीज को उनके उस विनम्र व्यवहार के लिए याद करते हैं। जब कम तनख्वाह होने के बावजूद वे गरीब छात्रों को अपने घर दावत पर बुलाया करते थे। 

Source: Good Deeds Always Come Back To You - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 26th December 2013

This Is Birthday Month Of Bollywood Actors - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 26th December 2013

यह है सितारों के जन्मदिन का महीना


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


दिसबंर माह में सबसे अधिक सितारे जन्मे हैं। दिलीप कुमार, राजकपूर, धर्मेंद्र शत्रुघ्न सिन्हा, राजेश खन्ना, सोहेल खान, सलमान खान, अनिल कपूर, जैकी भगनानी। इस जन्मदिन पर अनिल कपूर अत्यंत प्रसन्न हैं, उनका सीरियल '24' खूब सराहा गया और उनकी बेटी सोनम कपूर को भी दो सफल फिल्मों में काम करने का अवसर मिला रांझणा और 'भाग मिल्खा भाग'। उनकी छोटी पुत्री रिया अपनी दूसरी फिल्म 'खूबसूरत' बना रही है, पुत्र हर्षवर्धन मेहरा की फिल्म में प्रस्तुत हो रहे हैं। अनिल कपूर को गर्व है कि छप्पन वर्ष की वय में वे युवा सितारों की तरह फिट हैं और नियमित कसरत करते हैं। उम्र के दौर में व्यस्त होते हुए भी अनिल कपूर अपने परिवार के लिए खूब वक्त निकाल पा रहे हैं जैसा कि वे युवा वय में नहीं कर पाए। 

Source: This Is Birthday Month Of Bollywood Actors - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 26th December 2013 

Wednesday, December 25, 2013

Love Story Of Two Volcanoes - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 25th December 2013

दो ज्वालामुखियों की प्रेम कथा

परदे के पीछे  - जयप्रकाश चौकसे


रितिक रोशन इलाज कराकर अमेरिका से मुंबई आ गए हैं और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी पत्नी सुजैन के पिता संजय खान का कहना है कि रितिक और सुजैन के रिश्ते में दरार दुखद है परन्तु इस संभावना से इंकार नहीं किया कि वे दोनों अपने निकाह को बचा लें। इस बात से स्मरण होता है कि हॉलीवुड की शिखर सितारा एलिजाबेथ टेलर ने सितारे रिचर्ड बर्टन से विवाह किया था और तलाक के बाद उन दोनों ने दोबारा भी विवाह किया था। पहले तलाक के बाद रिचर्ड बर्टन ने कहा था कि हम एक ही मांस के दो लोथड़े हैं और अधिक समय अलग नहीं रह सकते । रिचर्ड बर्टन और एलिजाबेथ टेलर 1964 से 1974 तक साथ रहे और प्राय: वे दोनों एक दूसरे से लड़ते भी रहे। उनके विवाह संबंध की कुछ झलक हमें उनकी फिल्म 'हू इज अफ्रेड ऑफ वर्जीनिया वूल्फ' में देखने को मिलती है। यह एक कॉलेज कैम्पस में रहने वाले प्रोफेसर दंपत्ति की कहानी है। दोनों ही विद्वान है और उनके मिजाज में ही मिर्च है तथा दोनों ही शराब के जबरदस्त शौकीन है। उनके लिवर और दिल दोनों ही मजबूत हैं और एक दूसरे को खूब प्यार करते हुए भी एक दूसरे को आहत करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। 
सोर्स: Love Story Of Two Volcanoes - Parde Ke Peeche By  Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 25th December 2013

Tuesday, December 24, 2013

There Is Nothing Which Can Not Be Changed - Management Funda - N Raghuraman - 24th December 2013

ऐसा कुछ नहीं है, जिसे बदला न जा सके 


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


पहली कहानी: तमिलनाडु में चेन्नई से 150 किमी की दूरी पर एक गांव थंदलम। पिछले नौ साल में यह गांव कई लोगों के लिए मिसाल बन चुका है। इसके लिए बधाई की पात्र हैं राधा पार्थसारथी। वे 2004 से ही इस गांव में बदलाव के लिए कोशिश कर रही हैं। सबसे पहले उन्होंने गांव के हर घर में टॉयलेट बनवाने का अभियान चलाया। पूरे गांव में 260 टॉयलेट बन, जिस पर 15.60 लाख रु. खर्च हुए। स्वच्छ और साफ-सुथरे गांव के तौर पर थंदलम को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ने निर्मल ग्राम पुरस्कार भी दिया था। फिर उन्होंने गांव के टूटे-फूटे मंदिरों को बनवाया। थंदलम और उसके आसपास कभी कम बारिश नहीं हुई। लिहाजा राधा ने गांव के लोगों को रेनवाटर हार्वेस्टिंग (बारिश के पानी का संरक्षण) की तकनीक भी सिखा डाली। राधा ने विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर संपर्क किया। गांव में स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति के लिए पंप और दो सीमेंटेड सड़कों की सुविधा दिलाई। 

Source: There Is Nothing Which Can Not Be Changed - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 24th December 2013  

Multi Dimensional Effects Of Sensation Lovers - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 24th December 2013

सनसनी प्रियता के बहुआयामी प्रभाव 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


आदित्य चोपड़ा की फिल्म 'धूम 3' पहले तीन दिन में सौ करोड़ की आय का आंकड़ा पार कर चुकी है। धूम के पहले दो भागों के चोर पात्रों के पास चोरी करने के कोई ठोस कारण नहीं थे। रितिक अभिनीत भाग दो में तो वह डकैती महज थ्रिल के लिए डालता है। हॉलीवुड की 'बोनी एंड क्लाउड' के युवा अपराधी केवल अपने मनोरंजन के लिए डाके डालते हैं, हत्या करते हैं। फिल्म का पुलिस अफसर कहता है कि इन दोनों चोरों के जिस्म में सरेआम सैकड़ों गोलियां मारनी होंगी ताकि समाज में मात्र थ्रिल के लिए युवा वर्ग अपराधी नहीं बने। इस फिल्म से प्रेरित आदित्य चोपड़ा ने ही 'बंटी और बबली' बनाई थी परंतु उसका पुलिस अफसर उन्हें दंडित नहीं करता। दरअसल 'बंटी और बबली' 'बोनी एंड क्लाउड' का अत्यंत 'शाकाहारी' संस्करण था और उसके सामाजिक संदेश को गायब कर दिया गया था। पाठकों को स्मरण होगा कि कुछ वर्ष पूर्व कुछ अमीरजादों ने शौकिया चोरी की थी और वे पकड़े गए थे। आर्थिक व अन्य किसी मजबूरी से किया गया अपराध अलग श्रेणी में आता है क्योंकि उसमें निर्मम व्यवस्था अपराध की अदृश्य भागीदार होती है और उसे कभी कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता। इस तथाकथित थ्रिल के लिए कमसिन उम्र में सिगरेट और शराब पी जाती है तथा आजकल ड्रग्स का सेवन किया जाता है। 

Source: Multi Dimensional Effects Of Sensation Lovers - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 24th December 2013

Monday, December 23, 2013

If You Have The Intention, Then Anything Anywhere Can Happen - Management Funda - N Raghuraman - 23rd December 2013

इरादा हो तो कोई भी चीज कहीं भी लागू हो सकती है

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


दिसंबर की नौ तारीख को चेन्नई की पुलिस ने तय किया कि वह तत्काल प्रभाव से कार चालकों के लिए सीट बेल्ट की व्यवस्था लागू करेगी। और ठीक आठ दिन बाद 17 दिसंबर को आला अधिकारियों से फील्ड से रिपोर्ट मिली कि शहर में 99 फीसदी लोग सीट बेल्ट बांधने लगे हैं। यानी एक हफ्ते में पूरे शहर के कार चालकों ने वह करना शुरू कर दिया जो पुलिस विभाग करवाना चाह रहा था। और पुलिस ने लगाया क्या? हर सड़क पर 50 अफसरों की टीम। जो वहां 18-18 घंटे खड़े रही। जिसने लगातार सीट बेल्ट न बांधने वालों को पकड़ा। और उन पर कार्रवाई की। सबसे पहले चेन्नई पुलिस ने अभियान का विज्ञापन कराया। अखबार, रेडियो, टीवी हर जगह इसके बारे जानकारी दी गई। लोगों से सीट बेल्ट बांधने की अपील की गई। उसके बाद पुलिस ने एक तारीख तय की। और फिर पुलिस के जवान पूरे शहर में फैल गए। पहले दिन पुलिस वालों ने लोगों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ा। उन्हें बताया गया कि अगली बार अगर सीट बेल्ट नहीं बांधा तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरे दिन से उन्होंने सीट बेल्ट न बांधने वालों पर फाइन लगाना शुरू कर दिया। साथ ही ऐसा न करने से होने वाले नुकसान के बारे में भी समझाइश भी दी। 

Source: If You Have The Intention, Then Anything Anywhere Can Happen - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 23rd December 2013 

The World Of Self Centered Stars - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 23rd December 2013

सितारों का आत्मकेंद्रित संसार

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


विगत कुछ वर्षों से शाहरुख खान अपनी अभिनीत, अन्य निर्माताओं द्वारा बनाई फिल्मों के सारे अधिकार खरीद रहे हैं जिन्हें वे अपनी निर्मित फिल्मों के साथ अपनी लायब्रेरी को सैटेलाइट प्रदर्शन के लिए कुछ सीमित समय के प्रदर्शन के अधिकार बेचेंगे। इस कारण उनकी असफल फिल्मों के निर्माताओं को अनपेक्षित स्रोत से धन मिल रहा है, मसलन प्रवीण निश्चल की 'देशी बाबू विदेशी मेम' घोर असफल फिल्म थी और उन्हें करोड़ रुपए मिल गए। शाहरुख खान के काम में आदित्य चोपड़ा अपनी फिल्में कभी नहीं बेचेंगे, परंतु करण जौहर शायद उन्हें भेंट स्वरूप दे दें, क्योंकि वे ताउम्र कुंवारे रहने वाले हैं। ज्ञातव्य है कि आज अनेक सेवानिवृत्त निर्माताओं को आय का एकमात्र साधन पुरानी फिल्मों के सैटेलाइट अधिकार हैं, जो हर पांच या सात साल बाद फिर बेचे जाते हैं अर्थात् फिल्म अधिकार एक जायदाद है।

 Source: The World Of Self Centered Stars - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 23rd December 2013

Sunday, December 22, 2013

Engineering Students Mission - To Provide Cheap Treatment - Management Funda - N Raghuraman - 22nd December 2013

सस्ते इलाज के मिशन में जुटे इंजीनियरिंग छात्र 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पेश किए मॉडल्स से साफ है कि इंजीनियरिंग छात्र मेडिकल प्रोफेशन को गंभीरता से ले रहे हैं। उनका जोर लोगों को किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।

1. हर साल कई महिलाओं की पोस्टपार्टम हेमरेज की वजह से मौत हो जाती है। इसमें डिलीवरी के बाद बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है। कारण गर्भाशय में प्लेसेंटा रह जाना या लचीलापन नहीं होना है। इस समस्या को दूर करने के लिए चेन्नई के एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के पांच छात्रों ने एक महीने में गर्भाशय को गरमाहट देने की तकनीक ईजाद की, जिससे खून जमाया जा सके। उन्होंने पाया कि अति सूक्ष्म कण आपस में टकराने पर गरमाहट पैदा करते हैं। जो गर्भाशय की अंदरूनी दीवारों की गरमाहट के लिए पर्याप्त है। इससे लीक हो रही खून की कोशिकाओं को जमाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। 

Source: Engineering Students Mission - To Provide Cheap Treatment - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 22nd December 2013

Saturday, December 21, 2013

Idea's Should Be Big To Attract People's Attention - Management Funda - N Raghuraman - 21st December 2013

आइडिया बड़े हों ताकि लोगों का ध्यान खीचें

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


पहली कहानी: 

हर शहर की पुलिस को एक आम परेशानी है। वह ये कि दोपहिया वाहन चलाने वालों को हैलमेट पहनने के लिए कैसे राजी किया जाए। ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने मुंह फेरा नहीं कि लोग हैलमेट उतारकर गाड़ी के हैंडल पर टांग लेते हैं। या फिर उसे पीछे बैठे व्यक्ति को पकड़ा देते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में नासिक के एक 15 साल के बच्चे ने स्मार्ट हैलमेट बनाया है। इस बच्चे का नाम है अमिय नेरकर। अमिय रचना विद्यालय में 10वीं कक्षा में पढ़ता है। उसने जो हैलमेट बनाया है वह दोपहिया वाहन के इग्नीशन से जुड़ा है। इसकी खासियत ये है कि जब तक गाड़ी चलाने वाला हैलमेट नहीं पहने वह स्टार्ट ही नहीं होती। या पहना हुआ हैलमेट उतार दिया तो गाड़ी का इंजन बंद हो जाता है। अमिय ने तीन महीने से कम समय में इसे बनाया। उसने इसे पेटेंट कराने के लिए भी आवेदन किया है। हैलमेट में बहुत साधारण सा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, एक ट्रांसमीटर, रिसीवर और एक नौ वोल्ट की बैटरी इस्तेमाल हुई है। यह हैलमेट अपने आप यह पता लगा लेता है कि ड्राइवर ने उसे पहना हुआ है या उतार दिया। उसके हिसाब से यह इंजन को ऑन-ऑफ कर देता है। अमिय को यह आइडिया तब आया जब उसके पिता का एक्सीडेंट हुआ। उन्होंने हैलमेट नहीं पहना था। 

Source: Idea's Should Be Big To Attract People's Attention - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 21st December 2013 

Aamir, Aditya and Acharya's Dhoom - 3 - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 21st December 2013

आमिर, आदित्य व आचार्य की धूम तीन


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


आदित्य, आचार्य और आमिर खान ने 'धूम तीन' में इस ब्रांड के आजमाए हुए नुस्खों के साथ ही कहानी में नए मोड़, नए रिश्ते और तकनीकी चमत्कार का ऐसा रसायन बनाया है कि दर्शक चकाचौंध होने के साथ रिश्तों की भावनाओं से भी प्रभावित होता है। आमिर खान मनोरंजन जगत में अपने नएपन के लिए विख्यात हैं और इस फिल्म में अपनी दोहरी भूमिकाओं में उन्होंने प्रभाव पैदा किया है। आदित्य चोपड़ा एक समर्थ निर्माता हैं और उन्होंने असीमित साधनों का जमकर इस्तेमाल किया है। निर्माता आदित्य चोपड़ा की विशेषता यह है कि बॉक्स आफिस के परे व्यक्ति की योग्यता को जान जाते हैं, इसलिए टशन जैसी घोर असफल फिल्म बनाने वाले विजय कृष्ण आचार्य को उन्होंने 'धूम तीन' लिखने और निर्देशन की जवाबदारी दी जिसे आचार्य ने बखूबी निभाया है।

Source: Aamir, Aditya and Acharya's Dhoom - 3 - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 21st December 2013 

Friday, December 20, 2013

Young India In Shackles Of Facebook Fever - Management Funda - N. Raghuraman - 20th December 2013

युवा भारत को धीरे-धीरे जकड़ रहा है फेसबुक फीवर 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

यह बुखार कभी-कभी जानलेवा हो सकता है। और इसका इलाज अगर किसी के पास है तो वे हैं माता-पिता। बेंगलुरू का एक केस इसकी नजीर है। यहां 14 साल की एक लड़की ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। क्यों? क्योंकि उसके एक फेसबुक फे्रंड ने उसे धोखा दिया। घटना पिछले साल सितंबर की है। पुलिस का कहना है कि फेसबुक फे्रंड से लड़की ऑनलाइन बातचीत के दौरान ही प्यार करने लगी थी। उसके परिवार को इस बारे में पता ही नहीं था। यहां तक कि परिवार यह भी नहीं जानता था कि लड़की इंटरनेट पर समय भी गुजार रही है। 

Source: Young India In Shackles Of Facebook Fever - Management Funda By N. Raghuraman - Dainik Bhaskar  20th December 2013

Changing Formats of Circus - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 20th December 2013

सर्कस का बदला हुआ स्वरूप

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


हमारे यहां लंबे समय तक सर्कस मनोरंजन करते रहे हैं। प्राय: सर्कस किसी शहर में अपना विराट तंबू लगाकर महीना दो महीना शहर में करतब दिखाते थे, फिर किसी अन्य शहर की ओर कूच करते थे। सर्कस में मनुष्य और जानवर मिलकर तमाशा करते थे। इस समय भारत में शायद ही कोई सर्कस बचा हो। मनोंरजन के नित नए विकसित होते तमाशों ने सर्कस को अव्यावहारिक बना दिया। जानवरों पर अत्याचार नहीं होने के लिए शक्तिशाली संस्थाएं गठित हो गई और सर्कस असंभव हो गया। राजकपूर ने सर्कस की पृष्ठभूमि पर अपनी आत्म-कथात्मक 'मेरा नाम जोकर' रची और कुछ हास्य फिल्मों में भी सर्कस के प्रसंग आए। राकेश रोशन की 'कृष' में सर्कस के तंबू में आग लगने पर नायक बच्चों को बचाता है। 

Source: Changing Formats of Circus - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 20th December 2013

Thursday, December 19, 2013

Education Can Be Given Through Gilli - Danda - Management Funda - N Raghuraman - 19th December 2013

गिल्ली-डंडा से भी शिक्षा दी जा सकती है

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विस में काम करता था। काम भी ऐसा कि हमेशा आंकड़ों के इर्द-गिर्द। वह चाहता तो अपने वेतन के चेक में न जाने कितने जीरो जोड़ सकता था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय उसने उन लोगों को नंबरों की शिक्षा देने का फैसला किया जो मैथमैटिक्स से डरते हैं। 2011 में आठ युवा पेशेवरों ने भारी-भरकम वेतन पैकेज को ठुकराकर जरूरतमंद बच्चों को मैथ की शिक्षा देने का फैसला किया था। पढ़ाने का जरिया बनाया गिल्ली-डंडा और क्रिकेट को। इस समूह के अगुआ थे अभिषेक चक्रवर्ती। उम्र 29 साल। 

Source: Education Can Be Given Through Gilli - Danda - Management Funda By N. Raghuraman - Dainik Bhaskar19th December 2013

Reversal of Roles of Hero and Villain - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 19th December 2013

नायक खलनायक भूमिकाओं का उलटफेर 

परदे के पीछे -  जयप्रकाश चौकसे


कल आदित्य चोपड़ा की आमिर खान, कैटरीना कैफ अभिनीत धूम तीन प्रदर्शित होने जा रही है। प्राय: हमारी भव्य फिल्मों के प्रचार के लिए सितारे एक महीने तक विभिन्न शहरों में जाते हैं और टेलीविजन पर प्रसारित हर कार्यक्रम में शिरकत करते हैं। आदित्य चोपड़ा और आमिर ने इस फिल्म के लिए ऐसा कुछ नहीं किया और इस बात की चर्चा हो रही है गोयाकि नए ढंग से प्रचार हो रहा है। आदित्य चोपड़ा ने अभी तक अत्यंत संक्षिप्त हिस्से ही प्रचारित किए हैं और कोई गीत भी पूरा नहीं दिखाया गया है। उनका विचार है कि करोड़ों खर्च करके बनाया उच्च गुणवत्ता वाला माल मुफ्त में क्यों दिखाया जाए। धूम ऐसे भी एक ब्रांड है तथा ठंड और क्रिसमस तथा नववर्ष आगमन की छुट्टियां प्रारंभ होने जा रही हैं। प्राय: फिल्मों में सप्ताहांत के पश्चात सोमवार से गुरुवार तक टिकिट के दर कम कर दिए जाते हैं परन्तु इस फिल्म के नहीं किए जाएंगे। उन्हें अपने काम पर इतना भरोसा है कि उन्हें प्रचार की कवायद नहीं करना है और आज प्रथम दिन ही अग्रिम बुकिंग अत्यंत जोरदार हो रही है। 

Source:  Reversal of Roles of Hero and Villain - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 19th December 2013

Wednesday, December 18, 2013

You Stop Growing If You Stop Learning - Management Funda - N Raghuraman - 18th December 2013

सीखना छोड़ देते हैं तो बढ़त भी रुक जाती है 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के टर्मिनल टी-3 के बाहर इंतजार कर रही कार के ड्राइवर ने इंजन स्टार्ट ही किया था कि कार से अचानक बहुत तेज आवाज आने लगी। इतनी कि आसपास खड़े लोगों का ध्यान उसी पर टिक गया। मैंने ड्राइवर से पूछा तो उसने बिना परेशान हुए जवाब दिया, 'थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी साहब।' मेरी नजर कार के एयरकंडीशनर की ओर गई। मुझे उसके फैन के बैल्ट की गड़बड़ी समझ आई। मैंने ड्राइवर को एसी बंद करने के लिए कहा। एसी का स्विच ऑफ करते ही कार से आवाज आना भी बंद हो गई। गाड़ी आगे चल पड़ी। रास्ते में रामलीला मैदान के पास ड्राइवर ने रेगुलर मैकेनिक के पास गाड़ी रोकी। मैकेनिक ने उसे चैक करने के बाद मेरी आशंका को सही साबित कर दिया। कार के एसी में ही समस्या थी। ड्राइवर ने मुझसे पूछा, 'साहब आपको कैसे पता चला कि गाड़ी में क्या दिक्कत है? क्या आप कार मैकेनिक हैं?' मैं मुस्कराया और उससे कहा कि हमें यह सब स्कूल में पढ़ाया गया था। उसे समझ नहीं आया। उसे लगा कि मैं मजाक कर रहा हूं। कहने लगा, 'क्यों गरीब का मजाक उड़ा रहे हैं साहब?' बहरहाल मैं आपको बताना चाहूंगा कि अमेरिका में आधे से अधिक कार मालिक अपनी गाड़ी खुद ठीक करना जानते हैं। और करते भी हैं। यह इसलिए है क्योंकि अमेरिका में हाईस्कूल में ही बच्चों को एक स्पेशल क्लास अटेंड कराई जाती है। इसे शॉप कहते हैं। इसमें उन्हें मशीनों के बारे में बताया जाता है। उनमें किस तरह दिक्कत हो सकती है? उन्हें कैसे ठीक किया जा सकता है? यह भी उन्हें सिखाया जाता है। यह वहां सबसे लोकप्रिय क्लास है। लेकिन भारत में आम तौर पर ऐसा नहीं होता। 

Source: You Stop Growing If You Stop Learning - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar18th December 2013

Abbas Was Awake - Government Was Asleep - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 18th December 2013

जागता रहा अब्बास, सो रही है सरकार 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

बुद्धिजीवी विष्णु खरे ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री तिवारी को एक खत लिखा कि सात जून 2014 को ख्वाजा अहमद अब्बास की जन्म शताब्दी है और इत्तेफाक से लेखक कृष्णचंद्र की जन्म शताब्दी भी 28 नवंबर 2014 को है। इन दो लेखकों के जन्म शताब्दी वर्ष को पूरे देश में वर्षभर मनाया जाना चाहिए। यह दोनों ही लेखक प्रगतिवादी रहे हैं और फिल्मों से भी गहरे रूप से जुड़े हैं। अगर केंद्र सरकार अत्यंत व्यस्त है तो कम से कम हरियाणा की सरकार को ख्वाजा अहमद अब्बास की जन्म सदी वर्ष धूमधाम से मनानी चाहिए क्योंकि उनका जन्म पानीपत में हुआ था। गौरतलब यह है कि बीसवीं सदी के प्रारंभिक चरण में जन्मे बुद्धिजीवी सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे और अपनी बात कहने के लिए उन्होंने सिनेमा की व्यापक पहुंच देखकर उसके साथ जुडऩे से कभी परहेज नहीं किया।

Source: Abbas Was Awake - Government Was Asleep - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 18th December 2013

Tuesday, December 17, 2013

Informal Conversations Occasionally Leads To Great Ideas - Management Funda - N Raghuraman - 17th December 2013

कभी-कभी अनौपचारिक बातचीत से भी शानदार आइडिया आ जाते हैं 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

 

चीन में 2010 में पांच करोड़ एयरकंडीशनर बिके। भारत में भी इतने ही लेकिन पिछले दो साल में। अमेरिका का अनुमान है कि उनके यहां मौजूद एयरकंडीशंड कारें चलाने के लिए सालाना सात अरब गैलन गैसोलीन उत्पादों की जरूरत है। एयरकंडीशनर बेशक हमारी रोजमर्रा की जरूरत में जुड़ रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि इनसे हजारों-लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में पहुंच रही है। यह सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है। दुनिया का हर देश इसी दिक्कत से जूझ रहा है। इस वक्त सिर्फ इतनी ही जानकारी पढऩे के बाद आपको अपनी कार के शीशों से नफरत हो सकती है, क्योंकि न तो ये बाहर से आ रही गर्मी को ठीक से रोक पाने में सक्षम होते हैं और न ही ट्रैफिक सिग्नल पर होने वाली ताक-झांक रोक सकते हैं, लेकिन कल्पना कीजिए कि आपकी कार के शीशे स्मार्ट हो जाएं। वे ठंड के दिनों में सूरज की गर्मी को भीतर आने दें और गर्मियों में उसे रोकें तो कैसा रहे? क्या आप इस तरह के शीशों के इस्तेमाल के लिए उत्सुक नहीं होंगे? बिल्कुल होंगे। 

Source: Informal Conversations Occasionally Leads To Great Ideas - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 17th December 2013

What Does Salman Khans Painting Says - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 17th December 2013




































































Source: What Does Salman Khans Painting Says - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 17th December 2013

Sunday, December 15, 2013

Sell Idea Instead Of A Product - Management Funda - N Raghuraman - 15th December 2013





प्रोडक्ट के स्थान पर आईडिया को बेचें

मैनेजमेंट फंडा - एन रघुरामन





































































Source: Sell Idea Instead Of A Product - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 15th December 2013

Saturday, December 14, 2013

Schematic Agriculture May Overtake Industries - Management Funda - N Raghuraman - 14th December 2013

उद्योगों को पीछे छोड़ सकती है योजनाबद्ध खेती-बाड़ी

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


कुछ महीने पहले राम चरण नई कार खरीदने की योजना बना रहे थे। जबकि ओमप्रकाश जयपुर में घर खरीदने और कंचन सिंह बेटी की शादी की तैयारी में थे। ये तीनों किसान हैं। दो राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गोदूवाली धानी गांव के हैं और एक जोधपुर के। ये तीन सिर्फ एक उदाहरण हैं यह बताने के लिए किसान समृद्ध हो रहा है। राजस्थान की ही बात करें तो वहां ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ रही है। एशियन पेंट्स बड़ी मात्रा में पेंट्स बेच रही है, क्योंकि किसानों के नए घर बन रहे हैं। टाइल्स निर्माता लगातार इस क्षेत्र में अपने उत्पादों की आपूर्ति करने में लगे हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान गुआर फली के उत्पादन के मामले में दुनिया में नंबर एक है। 

Source: Schematic Agriculture May Overtake Industries - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 14th December 2013

Relevance Of Raj Kapoor's Cinema - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 14th December 2013

राजकपूर के सिनेमा की प्रासंगिकता 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


आज राजकपूर जिंदा होते तो नवासी (89) वर्ष के होते गोयाकि सिनेमा के जन्म के ग्यारह वर्ष पश्चात जन्मा उसका अनन्य प्रेमी! उनकी मृत्यु को भी पच्चीस वर्ष हो चुके हैं और इन पच्चीस वर्षों में सिनेमा और उसका अर्थशास्त्र बहुत बदल चुका है। राजकपूर ने अपनी पहली फिल्म का निर्माण और निर्देशन महज बाइस वर्ष की उम्र में किया था और पच्चीस की आयु में वे सबसे कम उम्र के स्टूडियो मालिक बने थे तथा आवारा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल फिल्म की रचना कर चुके थे। अपनी पहली फिल्म 'आग' उन्होंने दो लाख रुपये में बनाई थी और पच्चीस हजार के मुनाफा हुआ था। आज उनके पोते रनवीर कपूर को एक फिल्म में अभिनय के लिए चालीस करोड़ का मेहनताना दिया जा रहा है। 'आग' के प्रदर्शन के समय एक डॉलर एक रुपए में आता था, आज पैंसठ रुपए चुकाने पड़ते हैं। 

Source: Relevance Of Raj Kapoor's Cinema - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 14th December 2013

Friday, December 13, 2013

Go Beyond Your Routine Work And Increase Brand Value - Management Funda - N Raghuraman - 13th December 2013

तयशुदा काम से ज्यादा करके बढ़ाएं ब्रांड वैल्यू 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


पहली कहानी: चंदन कुमार शॉ कोलकाता में डोमिनो पिज्जा डिलीवर करने वाला लड़का है। पटना के आदित्यवीर सिंह नाम के रेल यात्री ने डोमिनो के काउंटर पर फोन कर के पिज्जा ऑर्डर किया। वह आगे की यात्रा में इसे ले जाना चाहता था। चंदन डिलीवरी लेकर निकलने ही वाला था कि आदित्य का दूसरा फोन आ गया ऑर्डर कैंसिल करने के लिए। इसकी उसने वजह भी बताई। कहा कि उसका पर्स कहीं खो गया है। लेकिन इसके बावजूद चंदन सात मिनट के भीतर डिलीवरी लेकर आदित्य के पास उसके होटल पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने आदित्य से कहा कि आपको पिज्जा के लिए पैसे देने की जरूरत नहीं है। यही नहीं, उसने आदित्य को 500 रुपए भी दिए, क्योंकि उसे पता चला कि आदित्य के पास पटना लौटने का टिकट तो है लेकिन होटल का बिल चुकाने के पैसे नहीं हैं। उसने आदित्य से कहा कि पटना पहुंचने के बाद वह ये पैसे उसके खाते में जमा करा दे। आदित्य इस सब के लिए शुक्रिया कह पाता इससे पहले चंदन वहां से चला गया। आदित्य ने पटना पहुंचकर चंदन के खाते में पैसे जमा कराए। साथ ही डोमिनो के मैनेजमेंट को पत्र लिखा और कहा कि पूरी जिंदगी डोमिनो के कर्मचारी की शालीनता को नहीं भूलेगा। 

Source: Go Beyond Your Routine Work And Increase Brand Value - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 13th December 2013

Ghost Village And Rugged Metros - Parde Ke Peeche - Jai Prakash Chouksey - 13th December 2013

भुतहा गांव और महानगर के बीहड़

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


हिंदुस्तान में सिनेमाघर नगरों में बने और उनमें ग्रामीण फिल्में दिखाई गईं तथा एक फार्मूले का जन्म हुआ कि गांव पवित्र है। शहर पाप है। गांव में सादगी और सत्य है। शहर में तड़क-भड़क और झूठ है। नगरों में ग्रामीण सिनेमा की सफलता का सिलसिला अनेक दशकों तक चला, क्योंकि इस सोच को धार्मिक आख्यानों में भी प्रतिपादित किया गया था। विगत कुछ वर्षों से सिनेमा ने ग्रामीण पृष्ठभूमि को नकार दिया है और नगरीय फिल्में बन रही हैं। सलीम जावेद ने मदर इंडिया और गंगा जमना के पात्र व नाटकीय प्रवाह को 'दीवार' में महानगरीय परिवेश में प्रस्तुत किया गोयाकि 'मदर इंडिया' का बिरजू, गंगा बनने के बाद महानगर में छलांग लगाता है और 'दीवार' सफल होती है। आर्थिक उदारवाद के परिणामस्वरूप मल्टीप्लेक्स आए। कॉर्पोरेट संस्कृति फिल्म निर्माण में प्रवेश कर गई और सिनेमा का अर्थशास्त्र ही बदल गया। 
 
Source:  Ghost Village And Rugged Metros - Parde Ke Peeche By Jai Prakash Chouksey - Dainik Bhaskar 13th December 2013

Thursday, December 12, 2013

Talent To Find Solutions Can Make Or Break Carrier - Management Funda - N Raghuraman - 12th December 2013

समाधान खोजने की प्रतिभा से बनता बिगड़ता है कैरियर

 मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


इंटरव्यू चल रहा था। इंटरव्यू लेने वाले ने पास खड़े नौकर को दो कप कॉफी लाने का इशारा किया। वह कॉफी लाया और एक-एक कप दोनों के सामने रख दिया। सवाल-जवाब का सिलसिला आगे बढ़ा। अचानक उम्मीदवार से इंटरव्यू लेने वाला पूछ बैठा, 'आपके सामने क्या है?' उम्मीदवार ने कह दिया, 'चाय।' जवाब गलत था लेकिन उम्मीदवार के चेहरे पर झलक रहे यकीन में पूरी सच्चाई थी। उसके दिमाग में कॉफी या चाय लेकर कोई भ्रम नहीं था। बस खुद पर भरोसे की इसी खासियत ने नौकरी के लिए उसका चयन करा दिया। अगली उम्मीदवार एक लड़की थी। इंटरव्यू ले रहे व्यक्ति ने उससे जानना चाहा, 'अगर एक दिन सुबह उठते ही तुम्हे पता चले कि तुम गर्भवती हो तो तुम्हारी प्रतिक्रिया क्या होगी?' लड़की ने बड़ी शांति से जवाब दिया, 'अपने पति के साथ उस पल को एंजॉय करूंगी।' उस लड़की का भी सिलेक्शन हो गया। इंटरव्यू लेने वाले को उम्मीद नहीं थी कि लड़की इतनी शांति से इस कदर सधा हुआ जवाब देगी, क्योंकि वह शादीशुदा नहीं थी। ऐसे सवाल जाहिर तौर पर अटपटे लग सकते हैं। लेकिन इंटरव्यू लेने वाले युवा पीढ़ी की प्रतिभा का आंकलन करने के लिए इन्हें आधुनिक तौर-तरीकों के तौर पर आजमा रहे हैं। खासकर यह देखने को कि युवाओं में भावनात्मक आवेग कितना है? दी गई स्थिति में वे किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं? साल 2014 तक भारत में 50 लाख लोग ग्रेजुएट हो जाएंगे। लेकिन इसका बुरा पहलू है कि इनमें सिर्फ 35 फीसदी ही रोजगार पाने लायक होंगे, क्योंकि बाकियों में जरूरी कौशल नहीं है। 

Source: Talent To Find Solutions Can Make Or Break Carrier - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 12th December 2013 

Varied Expressions Of Film Writers - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 12th December 2013

फिल्मी लेखकों के अंदाजे बयां 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


हर फिल्म की कथा-पटकथा फिल्म बनने के पहले सितारों, तकनीशियनों,संगीतकार, कैमरामैन, इत्यादि लोगों को सुनाई जाती है और इस तरह पचास बार सुनाई पटकथा में नुक्स किसी को नजर नहीं आते और प्रदर्शन के बाद कमियां ही उभरकर आती हैं। हर फिल्म की कुछ दिनों की रीशूटिंग जरूर होती है गोया कि कोई कमी नजर आई और उसे दूर करने का प्रयास हुआ। पटकथा लेखन सिखाने वालों ने अपने धंधे को कायम रखने के लिए पटकथा लेखन का हव्वा खड़ा कर दिया है मानो वह एटम बम बनाने का तरीका हो या मिट्टी से सोना बनाने का कीमिया है। संपादक सबसे अधिक बार हर दृश्य को देखता है तो क्या उसे दोष नजर नहीं आते। 

Source: Varied Expressions Of Film Writers - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 12th December 2013 

Wednesday, December 11, 2013

Your Name Can Become A Brand Even After Failure - Management Funda - N Raghuraman - 11th December 2013

असफलता के बावजूद ब्रांड बन सकता है आपका नाम 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


नई दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज में अपने साथ के और कई स्टूडेंट्स की तरह विपुल वेद प्रकाश भी ग्रेजुएशन कर रहा था। यह नई सहस्राब्दी शुरू होने से एक साल पहले यानी 1999 की बात है। उसने देखा कि उसके कई सीनियर अमेरिका की ओर रुख कर रहे हैं। वहां कोड राइटर के तौर पर काम करने वालों की काफी मांग थी। हजारों-लाखों अमेरिकी कम्प्यूटरों और उनकी एप्लीकेशन्स को मैनेज करने के लिए वहां लोगों की जरूरत थी। लिहाजा वेद प्रकाश ने भी कोड राइटिंग कोर्स ज्वाइन कर लिया, लेकिन एक दिक्कत थी। ग्रेजुएशन कोर्स के लिए कॉलेज में मिनिमम अटेंडेंस जरूरी थी। इसलिए वेद प्रकाश कोड राइटिंग पूरा ध्यान नहीं लगा पा रहा था। ऐसे में उसने अचानक एक दिन कॉलेज जाना बंद कर दिया। उस पर कॉलेज ड्रॉप आउट का ठप्पा लग गया। इस दौरान उसकी काफी आलोचना हुई, लेकिन उसने परवाह नहीं की। ठीक एक साल बाद यानी 2000 में उसे कैलिफोर्निया की म्यूजिक शेयरिंग साइट नैप्सटर से ऑफर मिल गया। यहां उसने पूरे तीन साल काम किया। 

Source: Your Name Can Become A Brand Even After Failure - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 11th December 2013

First School And Home Away From Home - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 11th December 2013

पहला स्कूल और घर से दूर घर

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे



डीएनए अखबार के मुंबई संस्करण में विगत कुछ समय से सितारों द्वारा लिखे कॉलम प्रकाशित हो रहे हैं। अब तक शाहरुख खान के दो कॉलम प्रकाशित हुए हैं और ट्विंकल अक्षय कुमार का एक कॉलम प्रकाशित हुआ। ज्ञातव्य है कि ट्विंकल डिम्पल कपाडिय़ा (बॉबी की नायिका) और राजेश खन्ना की पुत्री हैं। बॉबी देओल के साथ 'बरसात' तथा अन्य कुछ फिल्मों की नायिका रहीं हैं परंतु विवाह के बाद केवल पत्नी और मां के दायित्व का निर्वाह कर रहीं हैं। बिखरी दंपती की संतान होने की कोई कड़वाहट उनके व्यक्तित्व में नहीं है। उनके लेख में उन्होंने सारे युवा माता-पिता को विचार करने की बातें लिखी हैं कि आज के बच्चों को किस तरह पाला जाए। जानकारियों के इस भीषण जलप्रपात के युग में उन्हें उड़ते हुए छीटों से कैसे बचाएं और उजागर होते युग के भवसागर में वे कैसे तैरें, या उसे किस नाव पर सवार होकर पार करें। 

Source: First School And Home Away From Home - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 11th December 2013 

Tuesday, December 10, 2013

Get To The Bottom Of Pyramid, You Will Find The Numbers There - Management Funda - N Raghuraman - 10th December 2013

पिरामिड की बॉटम लाइन तक जाएं, नंबर वहीं मिलेंगे 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


साल 2010 में राम परमार पटना रेलवे स्टेशन पर रिक्शा चलाता था। एक सवारी से 10 रुपए के भाड़े के लिए जिरह कर रहा था। जब बात बन गई तो उसकी सवारी ने जेब से मोबाइल फोन निकाला। पत्नी को बताया कि दोपहर के खाने में वह देर से घर पहुंच पाएगा। ये दोनों पात्र याद दिला रहे हैं कि तीन साल पहले तक देश की आधी आबादी के पास ही मोबाइल था। राम परमार जैसे लोग इससे दूर थे। ये वे लोग थे जो मोबाइल का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। इस फर्क को उसी वक्त चार लोगों ने समझ लिया। इनके नाम हैं राजेश अग्रवाल, सुमित अरोरा, राहुल शर्मा और विकास जैन। ये माइक्रोमैक्स मोबाइल कंपनी में साझेदार हैं। राजेश सबसे बड़े हैं। वे कंपनी का फाइनेंस डिपार्टमेंट देखते हैं। हमेशा क्लास में टॉपर रहे सुमित कंपनी के चीफ टेक्नोलॉजी अफसर हैं। राहुल नए आइडिया और उस पर काम करते हुए जोखिम आदि के मामलों को देखते हैं, जबकि विकास कंपनी के लिए साझेदारी और समझौतों से जुड़ा काम करते हैं। 

Source:  Get To The Bottom Of Pyramid, You Will Find The Numbers There - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 10th December 2013

Literature Meet At Illiterates Studio - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 10th December 2013

अनपढ़ के स्टूडियो में साहित्य सभा

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


मुंबई में एक साहित्य सभा का आयोजन बांद्रा के महबूब स्टूडियो में किया गया और दूसरे दिन के सत्र का आरंभ करण जौहर के भाषण से हुआ। आजकल प्राय: साहित्य सभाओं में फिल्म वाले को आमंत्रित किया जाता है क्योंकि सभी कार्यक्रमों की सफलता उनके टेलीविजन पर दिखाए जाने पर निर्भर करने लगी हैं और कुछ चेहरे हमेशा मीडिया में सुर्खियों में रहने के जुगाड़ में सफल हैं। 
 
Source: Literature Meet At Illiterates Studio - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 10th December 2013

Monday, December 9, 2013

Politics - Devoid Of Star Cast - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 9th December 2013

राजनीति : सिताराविहीन फिल्म

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


इतवार की सुबह देश की अवाम चुनाव के नतीजों के प्रति उत्सुक रही और तमाम न्यूज चैनल को आज मनोरंजन प्रसारित करने वाले चैनलों से अधिक टी.आर.पी. मिलेगी परंतु फिल्म उद्योग के सितारों के लिए यह सुबह कुछ अलग अर्थ नहीं रखती है। उनके जीवन में राजनीति का कोई दखल नहीं है। उनकी सारी सोच कुछ इस तरह की है कि 'कोउ नृप होए हमें क्या हानि' उन्हें किसी के भी राजा बनने से कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां तक कि फिल्म के लेखकों को भी इसमें कोई रुचि नहीं है। फिल्म के सितारों को यह जानने में ज्यादा रुचि थी कि कल करण जौहर के कार्यक्रम में किस सितारे ने कौन सी गप्प उछाली और सनसनी पर आधारित कार्यक्रम में किस सितारे ने किसकी टांग खींचने का प्रयास किया। वे यह भी जानना चाहते थे कि राहुल रवैल के पुत्र की शादी में आदित्य चोपड़ा, जिसका सहायक है जूनियर राहुल, वह आया या नहीं और आया तो रानी मुखर्जी साथ थी या नहीं। 

Source: Politics - Devoid Of Star Cast - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 9th December 2013 

Sunday, December 8, 2013

Being Constant is Better Then Slow Speed - Management Funda - N Raghuraman - 8th December 2013

धीमी रफ्तार से बेहतर है निरंतरता के साथ तेजी

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


अति आत्मविश्वास, लापरवाही और पेड़ के नीचे सो जाने के कारण खरगोश रेस में कछुए से हार गया था। दोनों के बीच दोबारा रेस हुई। इस बार वह दौड़ा। लगातार दौड़ा। और रेस जीत गया। मैनेजर्स की मॉडर्न थ्योरी इसी सबक पर काम करती है। यह थ्योरी कहती है कि किसी भी संस्थान में वे कर्मचारी बेहतर काम करते हैं जो अपनी गति 'तेज और निरंतर तेज' बनाए रखते हैं। 'धीमी और एक-सी रफ्तार' बनाए रखने वाले बेहतर नहीं कर पाते। मार्केटिंग और मैनेजमेंट गुरु यह थ्योरी लिखते, इससे पहले ही सुुनीता शर्मा इसे अपना चुकी थीं। सुनीता शर्मा एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की पहली महिला सीईओ हैं। उन्होंने 1981 में अपना कॅरिअर शुरू किया। तब वे एलआईसी में सीधी भर्ती के जरिए चुनी गई थीं। उन्होंने हमेशा चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां स्वीकार कीं। उनके सहयोगियों का कहना है कि शुरू से सुनीता को हर समस्या को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना पसंद था। लेकिन इसमें कुछ फर्क था। 

Source:  Being Constant is Better Then Slow Speed - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 8th December 2013

Saturday, December 7, 2013

Kindness and Compassion In Heart Explains All - Management Funda - N Raghuraman - 7th December 2013

सब समझा देती है दिल में दया और करुणा 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


दुनिया की सबसे ग्लैमरस रिसॉर्ट सिटी से महज 10 किलोमीटर दूर है वह द्वीप। समुद्र तट के बहुत नजदीक। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए दक्षिणी अटलांटिक सागर के बर्फीले पानी के बीच 30 मिनट की यात्रा करनी पड़ती है। मदीबा के जीवन से जुड़े पहलुओं के अध्ययन के लिए दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों को बुलाया था। ये पत्रकार जब इस द्वीप की यात्रा पर थे तो सूरज को भी उन पर दया नहीं आ रही थी। ठंडी समुद्री हवाओं के थपेड़े उन्हें झकझोर रहे थे। लेकिन यह जानकर किसी को भी अचरज होगा कि भीषण ठंडे इलाके में स्थित इस द्वीप पर मदीबा ने जीवन के 27 साल गुजारे। जिस छोटे से कमरे वे रहते थे, पत्रकारों को वहां ले जाया गया। बताया गया कि मदीबा यहीं खुद को फिट रखने के लिए शैडो बॉक्सिंग की प्रैक्टिस भी करते थे। 

Source:Kindness and Compassion In Heart Explains All - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 7th December 2013 

Tale Of Half - Incomplete Films - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 7th December 2013

आधी-अधूरी फिल्मों की दास्तां 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


हॉलीवुड की सफल फिल्म श्रृंखला 'फास्ट एंड फ्यूरियस' के नायक पॉल वाकर की मृत्यु कार दुर्घटना में हो गई है और अब श्रृंखला की ताजी अधूरी फिल्म को किस तरह पूरा करें, इस पर सोच विचार चल रहा है। टेलीविजन में इस तरह की दुर्घटना के बाद नए कलाकार को लिया जाता है और दर्शकों को यकीन दिलाया जाता है कि यह वही पात्र है तथा चंद एपिसोड के बाद दर्शक अभ्यस्त हो जाते हैं। हिन्दुस्तानी सिनेमा के प्रारंभिक दौर में जब किवदंतियों पर फिल्म बनती थी, तब मरे हुए कलाकार की कमी को पूरा करने के लिए पिंजड़े में बंद परिंदा दिखाते हुए संवाद होता था कि जादूगर सामरी ने उस दुष्ट को परिंदा बना दिया है। प्राय: सामाजिक फिल्मों में दीवार पर लगी तस्वीर पर चंदन की माला चढ़ाकर पात्र को मृत घोषित कर देते थे। 'शबनम' नामक फिल्म में नायक श्याम की मृत्यु घुड़सवारी के एक दृश्य के समय हो गई थी और उस पात्र के पहले नकारे गए शॉट्स का इस्तेमाल करके किसी तरह फिल्म पूरी कर दी गई। 

Source:  Tale Of Half - Incomplete Films - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 7th December 2013

Friday, December 6, 2013

If You Want To Succeed, Then It is Obvious You Have To Think About Future - Management Funda - N Raghuraman - 6th December 2013

तरक्की करना चाहते हैं तो जाहिर है आगे की सोचें


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



हम जो कचरा रोज इधर-उधर फेंकते हैं, उसका क्या होता है? हममें से ज्यादातर लोगों को इस बारे में पता नहीं होगा, लेकिन अगर 22 विदेशी कंपनियों के रुझान का आकलन करें व उसे संकेत मानें तो हम समझेंगे कि हम कौन सा बिजनेस आइडिया खो रहे हैं। बीएमसी (बृहनमुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईओआई जारी किए। ईओआई मतलब एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट। ईओआई यह जानने के लिए कि कचरे के प्रबंधन का जो काम बीएमसी कराना चाहती है उसमें किस-किस की रुचि है। दुनिया की 22 अग्रणी कंपनियों ने बीएमसी के ईओआई पर अपनी प्रतिक्रिया दी। रुचि दिखाई। इनमें अमेरिका की ऑयल स्पिल ईटर इंटरनेशनल भी शामिल है। 

Source: If You Want To Succeed, Then It is Obvious You Have To Think About Future - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 6th December 2013

Katrina Kaif In Final Round - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 6th December 2013

कैटरीना कैफ निर्णायक दौर में


परदे के पीछे -  जयप्रकाश चौकसे


कैटरीना कैफ आमिर खान के साथ आदित्य चोपड़ा की 'धूम-3' मिलने पर अत्यंत प्रसन्न थीं और ऋतिक रोशन के साथ 'बैंग बैंग' मिलने पर खुश थीं परंतु आमिर ने 'धूम-3' की शूटिंग ऐन वक्त पर स्थगित कर दी। क्योंकि उनकी अपनी तैयारी संतोषप्रद नहीं थी। अत: कैटरीना का काफी समय बेकार गया, उन्हें अनचाही छुट्टी मिली। जिन लोकप्रिय कलाकारों का समय टकसाल होता है उनके लिए घर बैठने का अर्थ भारी घाटा है और लोकप्रियता की रेस में पिछडऩा सहन करना आसान नहीं होता। इसी तरह ऋतिक की बीमारी के कारण 'बैंग बैंग' के भी दो दौर स्थगित हो चुके हैं। अत: अगर समय धन है तो कटरीना से ज्यादा कोई धनवान नहीं। इन घटनाओं के कारण दीपिका पादुकोण शिखर सितारा हो गईं। 

Source: Katrina Kaif In Final Round - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 6th December 2013

Thursday, December 5, 2013

99 Cannot Erase 100% - Management Funda - N Raghuraman - 5th December 2013

99 कभी 100 फीसदी को हटा नहीं सकता

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन

 
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर इंजीनियरिंग कॉलेज की एक स्टूडेंट हमेशा 100 फीसदी खुश रहती है। वह सोचती है कि कुछ अच्छा हो तो ठीक, नहीं हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन उसे अपना 100 फीसदी देना है। उसने 1990 के दशक की शुरुआत में विप्रो कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया। उसे नौकरी मिल गई। उसे कंपनी के संभावित ग्राहकों को आगामी उत्पादों के बारे में बताने का काम सौंपा गया। वह अपने काम को पूरी प्रतिबद्धता से कर रही थी। 
 
Source:  99 Cannot Erase 100% - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 5th December 2013

Rowdy Rajkumar Is Not Rambo - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 5th December 2013

रैम्बो नहीं राउडी राजकुमार

परदे के पीछे  - जयप्रकाश चौकसे 

 

जब सोनाक्षी सिन्हा की दबंग और राउडी राठौड़ सफल रही तब उसने कहा, अब तो सफलता एक आदत हो गई है। अब लुटेरा और बुलेट राजा की असफलता पर वे अपने पिता के अकारण लोकप्रिय संवाद-अंश की तरह 'खामोश' हैं। मनोरंजन उद्योग हर बातूनी व्यक्ति को 'खामोश' कर देता है। शाहिद कपूर एक अदद सफलता के लिए इस कदर बेचैन हैं कि बड़बोले हो गए हैं। अरसे पहले करीना कपूर के साथ अभिनीत 'जब वी मेट' के बाद सफलता उनसे रूठ गई है। अब सोनाक्षी और शाहिद प्रभु (देवा) की शरण आ गए हैं। जो दक्षिण भारत के इडली-डोसा में उत्तर की छोले-भटूरे नुमा लोकप्रिय फिल्में गढऩे में माहिर हैं और हड्डी तोड़ नृत्य बनाने में उनका कोई सानी नहीं है। वे दक्षिण भारत में बनी फिल्मों को हिन्दी में बनाते हैं। रैम्बो राजकुमार को ही उन्होंने आर राजकुमार के नाम से बनाया है और हॉलीवुड के लोकप्रिय ब्रैंड रैम्बो से कॉपीराइट के मामले में न उलझ उन्होंने नाम रखा है आर राजकुमार। आप प्रभु देवा की फिल्मों को किसी भी नाम से पुकारें, वह रहती हैं उनकी ही ब्रैंड! वह चाहते तो इस फिल्म को राउडी राजकुमार भी कह सकते थे। 

Source:  Rowdy Rajkumar Is Not Rambo - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 5th December 2013

Wednesday, December 4, 2013

Each Person Has A Mission In Ones Life - Management Funda - N Raghuraman - 4th December 2013

हर व्यक्ति का जिंदगी में अपना एक मिशन होता है 

 मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


दीपा बिस्वास पश्चिम बंगाल के सेरामपुर की सांवली लड़की थी, लेकिन कोलकाता में सेंट मैरी एंड लोरेटो की स्टूडेंट होने के नाते उन्हें अपनी जिंदगी की बेस्ट टीचर मिलीं। जियोग्राफी की टीचर मदर टेरेसा। दीपा शुरू से प्रतिभाशाली थी। मदर टेरेसा जैसी समर्पित टीचर पाकर प्रतिभा में और निखार आया। इससे वह एक स्कॉलर बनकर प्रेसीडेंसी कॉलेज पहुंचीं। दीपा लंबी थी। फीचर भी अच्छे थे। पढऩे में और भी अच्छी। कई शिक्षकों की प्रिय तो बनना ही था। जब बॉटनी में फस्र्ट-क्लास-फस्र्ट आईं तो पूरे संस्थान में जश्न मना। जश्न के बीच भी दो लोग निराश थे। 
Source: Each Person Has A Mission In Ones Life - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 4th December 2013

Simple Solutions To Complicated Problems - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 4th December 2013

जटिल समस्याओं के सरल नुस्खे

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


एक विज्ञापन फिल्म में युवक युवती से प्रेमी की तरह आग्रह कर रहा है कि वह कल भी उसे बस स्टॉप पर मिलने का वादा करे और वह युवती के पीछे-पीछे उसके घर चला गया तथा युवती भी उससे लौटने का आग्रह कर रही है कि घर में माता-पिता हैं। सीढिय़ां चढ़कर युवती दरवाजे पर दस्तक देती है और एक स्त्री दरवाजा खोलकर कहती है कि बहू आज देर कर दी, तब युवक अपनी मां से कुछ कहता है गोयाकि ये युवा लोग विवाहित हैं परंतु अविवाहित प्रेमियों की तरह बातें कर रहे थे। संदेश स्पष्ट है कि विवाहित जीवन में तरह-तरह की भूमिकाएं करके प्रेम को जीवित और रोचक बनाए रखना होता है। सभी रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार करने पर ही वे बने रहते हैं। दरअसल किसी भी रिश्ते का निर्वाह उसके लिए स्थापित तौर तरीकों से परे जाकर करना होता है। सिनेमा की तरह जीवन में भी कोई निश्चित कार्यक्रम या फॉर्मूला नहीं है। फिल्म इतिहास में अधिकांश सफलतम फिल्में लीक से हटकर बनी हैं। दरअसल पूर्व परिभाषित दोहराव से बचना चाहिए। यह धारणा भी गलत है कि कलाकार ही सृजन करते हैं, आम आदमी रोजमर्रा के जीवन में सृजन का काम कर सकता है। रिश्तों में ऊर्जा बनाए रखना और अपने जीवन को निरंतर मनोरंजक बनाए रखना भी सृजन का ही काम है। गंभीरता ओढ़कर भारी भरकम श?दों से बोझिल बनाकर कही गई बातें दर्शनशास्त्र नहीं है, जीवन में आनंद लेना और दूसरों को देना भी सृजन जैसा ही कार्य है। ऋषिकेश मुखर्जी की 'आनंद' में कैंसर पीडि़त नायक अपने इर्द-गिर्द के परायों को अपना बनाता है और चरित्र भूमिका में जॉनी वॉकर भी यही काम करते हैं। 
 
 स्रोत : Simple Solutions To Complicated Problems - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - दैनिक भास्कर 4th December 2013

Tuesday, December 3, 2013

If You Want To Know The Limits of Possibility, Then Go Past The Impractical Limits - Management Funda - N Raghuraman - 3rd December 2013

संभव की सीमा जाननी है तो असंभव के पार जाइए

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

 

बदनगढ़ी राजस्थान के अलवर जिले का एक गांव है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इस गांव की आबादी महज 169 है। इतनी कम आबादी वाले गांव में स्कूल, सार्वजनिक शौचालय, ठीक-ठाक सड़क, पानी या बिजली के कनेक्शन की उम्मीद करना बेमानी ही है। और ऐसे गांव में रहने वाले लोग भला क्या सोचते होंगे। शायद यह कि यही उनकी किस्मत है, लेकिन मणिराम शर्मा नाम के उस बच्चे ने ऐसा नहीं सोचा। वह उस रास्ते पर आगे बढ़ा जिस पर चलने से बाकी लोग झिझकते रहे। वह रोज गांव से पूरे पांच किलोमीटर दूर पैदल चलकर स्कूल में पढ़ने जाता। अचानक तभी उसे एक दिन अहसास हुआ कि उसको सुनने में परेशानी है। गांव में स्वास्थ्य सुविधा तो थी नहीं। तो मणिराम का इलाज कैसे होता। फिर उसने इन्हीं हालात में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में टॉप किया। राज्य बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में वह मैरिट लिस्ट में पांचवें और 12वीं में सातवें नंबर पर रहा। 

स्रोत:  If You Want To Know The Limits of Possibility, Then Go Past The Impractical Limits - Management Funda By N Raghuraman - दैनिक भास्कर 3rd December 2013

What To Show - What To Hide - How To Say ? Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 3rd December 2013

क्या दिखाएं, क्या छुपाएं, कैसे कहें?

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


अखबार की खबर है कि अमिताभ बच्चन अपने पिता श्री हरिवंशराय बच्चन के जीवन पर आधारित बायोपिक में उनकी भूमिका करना चाहते हैं। ज्ञातव्य है कि श्री हरिवंशराय की आत्मकथा चार खंडों में प्रकाशित हुई है। इसे साहित्य में बड़ी ईमानदारी से लिखी आत्मकथा माना जाता है। विशेषज्ञों की राय है कि वे अपनी आत्मकथा के लिए अपने काव्य से भी अधिक जाने जाएंगे। अनेक दशकों बाद भी साहित्य में उनका स्थान 'क्या भूलूं, क्या याद करूं', 'नीड़ का निर्माण फिर' और 'प्रवास की डायरी' के लिए याद किया जाएगा। 
 
Source: What To Show - What To Hide - How To Say ? Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 3rd December 2013 

Monday, December 2, 2013

If Life Challenges You Then You Must Fight It - Management Funda - N Raghuraman - 2nd December 2013

जिंदगी चुनौती दे तो आप उसका मुकाबला कीजिए

 मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

 

बेंगलुरू से करीब 110 किलोमीटर की दूरी पर है कोलार गोल्ड फील्ड। इस फील्ड में करीब 200 टन सोना होने का अनुमान है। इसकी बाजार में कीमत करीब 60 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। सात दिन पहले इस गोल्ड फील्ड के बारे में एक खबर छपी थी। इसमें बताया गया था कि अगले साल अप्रैल से फिर यहां खनन शुरू होने की संभावना है, लेकिन सोने की खदान वाले इस इलाके में रहने वाले उस बच्चे के पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। सिर्फ 10 साल की उम्र थी। चौथी कक्षा में पढ़ रहा था, तभी उसके माता-पिता का देहांत हो गया। कोलार से कुछ दूरी पर स्थित मलूर गांव में हुए एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई थी। एक-दो दिन तक उस अनाथ बच्चे को कुछ लोगों ने खाना-पीना दिया, लेकिन उसके बाद किसी ने नहीं पूछा। उसके भूखे-प्यासे होने की, मूलभूत जरूरतों की किसी को चिंता नहीं थी। 

स्रोत : If Life Challenges You Then You Must Fight It - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 2nd December 2013

Atomic Explosion At The Time Of Stress - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 2nd December 2013

तनाव के क्षण का आणविक विस्फोट

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

अच्छे और बुरे लोगों में एक अंतर यह है कि अच्छा आदमी अपने मनोभावों पर लंबे समय तक नियंत्रण नहीं रख पाता, वह किसी मुखौटे को देर तक नहीं पहन पाता। इसी तरह संकट के समय भी उससे बचने के लिए आवश्यक नाटक देर तक नहीं निभा पाता। इसके विपरीत बुरे लोग ताउम्र मुखौटा धारण किए रहते हैं और गिरगिट से भी तेजी से रंग बदल लेते हैं। उनके पास स्टील की नव्र्स होती है। उनके हाथ नहीं कांपते, उन्हें पसीना नहीं आता। अनिल कपूर के सीरियल '24' में प्रधानमंत्री की मीडिया सचिव ने अपने अंतरंग मित्र की तस्वीर पहचान ली और अधिकारियों को बता दिया है कि अनजाने ही इस कातिल के प्रेम में वह फंस गई हैं। अब अधिकारी इसका लाभ उठाना चाहते हैं कि वह कातिल के पर्स में एक अत्यंत लघु माइक छुपा दे ताकि उसकी बातें सुनकर पूरे दल तक पहुंचा जा सके। उनके मिलन स्थल पर कैमरे छुपे हैं और पल-पल की खबर सुरक्षा अफसरों को मिल रहीं है। उसने माइक कातिल के पर्स में छुपा दिया हैं और योजना के अनुसार अब उसे वहां से निकल जाना चाहिए परन्तु अपराध बोध और आत्मग्लानि से पीडि़त महिला अपनी वृहतर भूमिका को भुला देती है और कातिल को चाकू मार देती हैं, सुरक्षा दल की पूरे गैंग को पकडऩे की योजना ठप्प हो जाती है। 

Source:  Atomic Explosion At The Time Of Stress - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 2nd December 2013

Sunday, December 1, 2013

Youth Must Take Creative Risks To Become Successful - Management Funda - N Raghuraman - 1st December 2013

सफलता के लिए जोखिम उठाएं क्रिएटिव युवा

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 



कई युवा उद्यमियों ने अमेरिकी कॉफी चेन स्टारबक्स की सफलता के तौर-तरीकों और उसके राज के बारे में जरूर सोचा होगा। और निश्चित तौर पर ऐसे ही किसी बिजनेस आइडिया के बारे में सपने भी देखे होंगे। लेकिन रिजवान अहमद और अदनान यूसुफ ने न केवल सपना देखा व सोचा, बल्कि एक कदम आगे बढ़ते हुए सत्तार  बक्श नाम से कैफे भी शुरू किया। यह नाम और लोगो स्टारबक्स से मिलता-जुलता है। माहौल भी स्टारबक्स जैसा ही है। लेकिन यहां मिलने वाली डिश एकदम देसी हैं, जिन्हें आधुनिक अंदाज में परोसा जाता है। यह कैफे पाकिस्तान के कराची में क्लिफ्टन ब्लॉक 4 में है। ब्रांड और लोगो को देखने के साथ ही हमारा दिमाग इसे मूल कंपनी से जोडऩे में जरा भी वक्त नहीं लगाता। कराची का यह कैफे इंटरनेशनल ब्रांडिंग के साथ ग्राहकों को स्थानीय नाश्ता और चाय परोसता है। 

स्रोत:  Youth Must Take Creative Risks To Become Successful - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 1st December 2013  

Saturday, November 30, 2013

Either Find A Way or Make One - Management Funda - N Raghuraman - 30th November 2013

रास्ता या तो ढूंढ लीजिए या बना दीजिए 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 



उनकी लंबाई छह फीट के करीब है। देखने में सुंदर, सुशिक्षित और अपने पेशे में सम्मानित। वह सिर्फ डॉक्टर और सर्जन नहीं हैं बल्कि ऑर्थोपेडिक सर्जरी की फील्ड में सर्वश्रेष्ठ लोगों में गिने जाते हैं। लोग उन्हें दिखाने के लिए, उनसे सलाह लेने के लिए महीनों तक इंतजार करते हैं। खासकर अगर कंधे से जुड़ी कोई समस्या हो तो। या फिर किसी दुर्घटना में कमर के ऊपर कोई दिक्कत आ गई हो तो। अमेरिका में वे उन डॉक्टरों में शामिल हैं, जिनकी सबसे ज्यादा पूछ-परख है। लेकिन उनके जीवन में 2009 में एक बड़ी परेशानी आई। उनकी रीढ़ की हड्डी में कहीं खून की थैली बन जाने का पता चला। इस बीमारी को कैवरनस हेमैन्जिओमा कहते हैं। ऑपरेशन के जरिए रीढ़ की हड्डी से खून की थैली को हटाया जा सकता था। लेकिन डर था। उनके डॉक्टर दोस्त ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान या बाद में उन्हें लकवा मार सकता है। इसलिए उन लोगों ने ऑपरेशन न करने का तय किया। तब तक जब तक कि इस समस्या से उन्हें कोई खास दिक्कत न हो। जिंदगी चलती रही। ग्यारह महीने निकल गए। फिर एक दिन अचानक जब वे ऑपरेशन थिएटर की ओर जा रहे थे, उनके रीढ़ की हड्डी में मौजूद खून की थैली फट गई। उन्हें तुरंत ऑपरेशन के लिए ले जाना पड़ा। सितंबर 2010 की बात है यह। उनका ऑपरेशन हुआ और उनके कमर के नीचे के हिस्से में लकवा मार गया।

स्रोत: Either Find A Way or Make One - Management Funda By N Raghuraman - dainik bhaskar 30th November 2013 

"Patience Stone" And Women Consideration - Parde Ke - Peeche - Jaiprakash Chouksey - 30th November 2013

'पेशन्स स्टोन' और स्त्री विमर्श 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


अफगानिस्तान में जन्मे इक्यावन वर्षीय अतिक राहिमी की फिल्म 'द पेशेन्स स्टोन' संभवत: गोवा में चल रहे महोत्सव की श्रेष्ठ फिल्म है, जो उनके स्वयं के ही लिखे फ्रेंच उपन्यास पर आधारित है और शायद विश्व में पहली बार एक फिल्मकार ने अपने ही उपन्यास पर फिल्म बनाई है। रूसी आक्रमण के समय 1984 में अतिक राहिमी फ्रांस चले गए थे और सोरबार्न विश्वविद्यालय में उन्होंने पढ़ाई की। इसके पहले उन्होंने अपने ही उपन्यास 'अर्थ एंड एशेज' पर बनी फिल्म के लिए 25 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। 

स्रोत:  "Patience Stone" And Women Consideration - Parde Ke Peeche By  Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 30th November 2013

Friday, November 29, 2013

Keep Doing Something New So That You Are Talked About - Management Funda - N Raghuraman - 29th Novemebr 2013

कुछ नया करते रहिए, ताकि आपकी चर्चा हो

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


सोचिए, आप इंटरनेट पर बैठे हैं। मेल चैक कर रहे हैं, तभी कंप्यूटर स्क्रीन पर एक पॉप विंडो खुलती है। शादी-समारोह का निमंत्रण पत्र आपके सामने होता है। आप इसे पढ़ते हैं। तभी आपके लिए दो विकल्प पेश हो जाते हैं । एक में पूछा जाता है कि आप समारोह में शामिल हो रहे हैं तो क्लिक करें। दूसरे में कहा जाता है समारोह में शामिल नहीं हो रहे हैं तो क्लिक करें। आप दूसरे विकल्प को चुनते हैं तो तुरंत एक अन्य संदेश आपके सामने होता है। इसमें लिखा होता है, 'हम कामना करते हैं कि आप इस समारोह में शामिल हो पाएं।' आपने पहला विकल्प चुना तो आप दूसरे पेज पर पहुंच जाएंगे। यहां आपसे आपका ईमेल एड्रेस फिर से दर्ज करने का आग्रह किया जाएगा। जैसे ही आप ईमेल एड्रेस दर्ज करते हैं, तो आपसे वेडिंग कोड (एक तरह का पासवर्ड) पूछा जाएगा। समारोह में शरीक होने वाले सभी अतिथियों को यह वेडिंग कोड याद रखना अनिवार्य किया गया है, तभी आप समारोह स्थल में अंदर जा सकेंगे। अगर आप वेडिंग कोड भूल गए हैं तो आपको याद दिलाने के लिए ऑनलाइन मदद मिल जाएगी। वेडिंग कोड डालते ही आपकी एंट्री दर्ज हो जाएगी। 

स्रोत : Keep Doing Something New So That You Are Talked About - Management Funda By N.  Raghuraman - Dainik Bhaskar 29th Novemebr 2013

Tigmanshu Dhulia Can Be Recognized By Commercial Masks Too - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 29th November 2013

तिग्मांशु को व्यावसायिक मुखौटों के साथ भी पहचाना जा सकता है 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे

 
तिग्मांशु धूलिया की 'पान सिंह तोमर' को भूलना संभव नहीं परंतु 'बुलेट राजा' में वे चंबल से दूर भीतरी उत्तरप्रदेश पहुंच गए हैं, जहां का मतदाता भारत के भाग्यविधाता को चुनने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चंबल जैसी ताकतें उत्तरप्रदेश में हर कालखंड में सक्रिय रही हैं। 'बुलेट राजा' का ऊपरी स्वरूप एक सामान्य एक्शन व्यावसायिक फिल्म का ही है। इस तरह की फिल्मों के लिए डायरेक्टर खोजने में मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे भी किसी भी सितारे की फिल्म में डायरेक्टर ढूंढ़े नहीं मिलता, परंतु यह माध्यम ही कुछ ऐसा है कि सितारा न निगलते बनता है, न उगलते बनता है। 
 
स्रोत : Tigmanshu Dhulia Can Be Recognized By Commercial Masks Too - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 29th November 2013

Thursday, November 28, 2013

Obstacles Can't Stop You, If You Have A Winning Habit - Management Funda - N Raghuraman - 28th November 2013

जीतने की आदत है तो बाधाएं रोक नहीं सकतीं

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


उसे पहली बार भारत के राष्ट्रपति ने नेशनल अवॉर्ड दिया। कुछ समय ही बीता कि दूसरी बार उन्हीं राष्ट्रपति के हाथ से अगले नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित होने का मौका मिल गया। उसे उसकी नई खोज के लिए अवॉर्ड मिले थे। इसके बाद राष्ट्रपति बदले लेकिन नेशनल अवॉर्ड लेने की उसकी आदत नहीं बदली। अगले महीने यानी दिसंबर में उसे चौथा नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला है। तकनीक और इससे जुड़े उपकरण आए दिन तो सस्ते नहीं होते, लेकिन बेंगलुरू के आरएस हिरेमथ के लिए यह बाएं हाथ का काम है। वे गरीबों के लिए लगातार नए और सस्ते उपकरण विकसित कर रहे हैं। उनका ताजा आविष्कार है- सौर ऊर्जा से चलने वाली कान की मशीन का चार्जर। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से चौथा नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला है। 

स्रोत : Obstacles Can't Stop You, If You Have A Winning Habit - Management Funda - N Raghuraman - दैनिक भास्कर 28th November 2013  

Deepika Padukone - A Fun Frolic Actress - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 28th November 2013

दीपिका पादुकोण दीवानी मस्तानी नायिका 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


इस वर्ष दीपिका पादुकोण ने तीन सफल फिल्मों में न केवल अभिनय किया है वरन् इन तीनों फिल्मों में उसकी भूमिकाएं केंद्रीय है। प्राय: फिल्में नायक को केंद्र में रखकर बनाई जाती है और नायिकाएं गीत गाने और दो चार प्रेम दृश्य करने के लिए ली जाती हैं परन्तु दीपिका पादुकोण की ये जवानी है दीवानी, चेन्नई एक्सप्रेस और रामलीला में नायिकाएं महज सजावट की चीजें नहीं हैं वरन् उनका अपना व्यक्तित्व है और नायकों के समानांतर महत्व उन्हें मिला है। यह एक ऐसी महत्वपूर्ण चीज है जिसका भूतपूर्व शिखर महिला सितारा जैसे कटरीना कैफ या करीना कपूर मुकाबला नहीं कर सकतीं। वे अपनी फिल्म में कमोबेश सजावट के रूप में ही सामने आई थी। दीपिका ने अब नया मानदंड स्थापित कर दिया है। 

स्रोत: Deepika Padukone - A Fun Frolic Actress - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 28th November 2013 

Wednesday, November 27, 2013

You Will Have To Pay Heavy Price For Excessive Pampering - Management Funda - N Raghuraman - 27th November 2013

ज्यादा प्यार-दुलार की भी कीमत चुकानी पड़ती है

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


समीर 10वीं कक्षा का छात्र है। कोलकाता के बड़े स्कूल में पढ़ता है। अपने परिवार में अकेली संतान और परिवार के हर सदस्य का लाड़ला। उसकी हर ख्वाहिश पूरी हो जाती है। समीर को पिज्जा और बर्गर अच्छे लगते हैं और उसके माता-पिता ने कभी उसे मना नहीं किया। हालात ये हैं कि लंच टाइम की घंटी बजते ही पड़ोस के फूड ज्वाइंट समीर के लिए गरमा-गर्म पिज्जा सप्लाई कर देते हैं। लेकिन चार साल में क्या हुआ? नियमित परीक्षण के दौरान पता चला कि समीर के लिवर में काफी चर्बी जमा हो गई है। ज्यादा फास्ट फूड खाने के कारण उसको यह परेशानी हुई। वह बीमारी के उस चरण में पहुंच चुका है, जहां से लौटना संभव नहीं है। क्या सिर्फ समीर की यह हालत है? नहीं। डायबिटीज अवेयरनेस एंड यू (डीएवाई) नामक संस्था की ओर से एक अध्ययन कराया गया। इसके मुताबिक कोलकाता के कई बच्चे कमजोर लिवर के शिकार हो चुके हैं। उनमें सामान्य से 15 साल पहले ही डायबिटीज जैसी बीमारी होने की भी आशंका है। यही नहीं 12 से 16 साल की उम्र के 12-15 फीसदी बच्चों के लिवर में खतरनाक स्तर तक चर्बी जमा है। इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। 

स्रोत:  You Will Have To Pay Heavy Price For Excessive Pampering - Management Funda By  N Raghuraman - Dainik Bhaskar  27th November 2013

Serial "24" Has Reached Upto The Intestines - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 27th November 2013

अंतडिय़ों तक पहुंचा '24' सीरियल 

 परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


हर शुक्रवार-शनिवार रात 10 बजे कलर्स पर अनिल कपूर के सीरियल '24' का प्रसारण होता है। एक सफल अमेरिकन सीरियल का हिंदुस्तानी संस्करण बड़ी निष्ठा से बनाया गया है। यह अगर महज एक स्पाई थ्रिलर होता तो शायद दर्शक को इस तरह नहीं बांध पाता। उसके हर क्षण में तनाव एवं मानवीय संवेदना भरी है। अपनी भावना की तीव्रता से सीरियल दर्शक की अंतडिय़ों तक जा पहुंचता है। दर्शक पात्रों के डर को महसूस करता है। उसके तनाव को जीता है। इस आत्मीय तादात्म्य को बनाने के लिए निर्देशक ने मानवीय मनोविज्ञान का सहारा लिया है। मसलन, अनिल कपूर की पत्नी और बेटी को एक संकट से बचाया जा चुका है। परंतु उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जिस एजेंट को अनिल ने भेजा है, वह कभी उससे गहरा प्यार करती थी। लेकिन अनिल उसकी योग्यता मात्र का कायल था। बहरहाल, पत्नी यह सब जानती है। वह एजेंट से व्यक्तिगत सवाल पूछना शुरू करती है। जबकि एजेंट को उसे इंटेरोगेट करना है। इस उल्टे इंटेरोगेशन से एजेंट आहत हो जाती है। अपना काम अपने सहायक को सौंपती है। इस भावना के द्वंद्व का परिणाम यह होता है कि योग्य एजेंट के जाते ही अनिल की पत्नी फिर संकट में पड़ जाती है। उसकी जान पर बन आती है। सारे सीरियल में इसी तरह के भीतरी द्वंद्व को बाहरी घटनाओं से बखूबी जोड़ा गया और दोहरे द्वंद्व की धार से दर्शक अप्रभावित नहीं रह पाता। 

स्रोत:  Serial "24" Has Reached Upto The Intestines - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - dainik bhaskar 27th November 2013 

Tuesday, November 26, 2013

If Relations Between Past and Future Are Good Then Present Will Be Better - Management Funda - N Raghuraman - 26th November 2013

अतीत और भविष्य के संबंध अच्छे हों तो वर्तमान बेहतर होगा 

 मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


पुणे के तंबात समुदाय से ताल्लुक रखते हैं बालचंद्र काडू। तांबे के बर्तन बनाते हैं। शहर के कस्बा पेठ इलाके में उनकी वर्कशॉप है। वे अपने समुदाय की सातवीं पीढ़ी हैं। करीब 400 साल पहले यह समुदाय पुणे और आस-पास के इलाके में आकर बसा था। पहले यह पेशवा शासकों के लिए हथियार वगैरह बनाता था। अब तांबे के बर्तन, कलाकृतियां बनाकर जीविका चला रहा है। एक साल पहले की बात है। बालचंद्र अपनी वर्कशॉप में तांबे की थाली बना रहे थे। उन्होंने उसे हर तरफ से देखा। सब कुछ ठीक पाकर उन्हें अपने काम पर संतुष्टि और खुशी हुई। लेकिन दुख के दो कारण भी थे। पहला यह कि 14 घंटे आग के सामने बैठकर बनाई शानदार कलाकृति के सिर्फ दो-तीन सौ रुपए ही मिलने थे। दूसरा, उनके बच्चे ने इस काम में हाथ बंटाने से साफ इनकार कर दिया था। उनके लड़के ने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में करिअर चुना है। यह कहानी सिर्फ बालचंद्र की है, ऐसा नहीं है। पूरे तंबात समुदाय में ऐसे ही किस्से हैं। नई पीढ़ी अपना परंपरागत काम छोड़कर वह करिअर चुन रही है जहां ज्यादा पैसे मिलें। 
 
स्रोत : If Relations Between Past and Future Are Good Then Present Will Be Better - Management Funda By N Raghuraman - दैनिक भास्कर 26th November 2013